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Meera Parihar

Others

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Meera Parihar

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ऑटो की सवारी

ऑटो की सवारी

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 जिसने सामूहिक ऑटो की सवारी नहीं कि उसने जीवन के ऐसे बहुत से लम्हे गंवा दिए जो उसे एक विचारधारा, एक साहित्य और जीवन दर्शन से जोड़े रखते हैं। ऐसी ही एक बानगी से गुजरती है यह कहानी ऑटो की । 

पीछे की सीट पर चार सवारी सट कर बिठाई गई हैं। आगे भी ड्राइवर के अतिरिक्त तीन सवारियां बैठी हैं । थोड़ी ही दूर चले थे कि सड़क के किनारे एक ऑटो चालक शराब पीकर बेसुध नाली के किनारे फुटपाथ पर सो रहा था। उसका ऑटो पास में ही खड़ा था। यह नजारा हम सभी ने देखा तभी आगे बैठी एक सवारी ने कहा," शराब ने न जाने कितने घर बर्बाद कर दिए, बच्चे भूखे रहते हैं। पढ़ने नहीं जा पाते हैं। महिलाएं पीटी जाती हैं। बहुत खराब आदत पड़ती है उसकी। नए-नए लड़के बियर पी रहे हैं। कहते हैं कि गर्मी में ठंडक देती है, पेट ठंडा रहता है। पर ! भाई साहब ! उसमें थोड़ी सी मिली होती है। आगे चलकर यही लड़के कहते हैं, "बियर से सुरूर नहीं आता है। फिर शराब पीने लगते हैं ।"


" मुझे देखो ! मैं वकील हूँ, फ्री में पिलाते हैं लोग। पी लो यार! पर मैं नहीं पीता। गरीबों की फ्री सेवा करता हूँ। केवल पैसे वालों से ही फीस लेता हूँ। बड़ी मुश्किल से मनुष्य का जीवन मिलता है। इसे अच्छे कामों में लगाना चाहिए है कि नहीं ?" 


तभी दूसरी सवारी ने कहा," सरकारी वकील हैं आप ? दीवानी में है या कलेक्ट्रेट में है ?"


"मैं दीवानी में हूँ, सरकारी तो पहुंँच वाले ही बन पाते हैं। कुछ आए या ना आए बस पौवा होना चाहिए। अपना तो गुजारा चल रहा है । बीस साल हो गए इस काम में।"


दूसरी सवारी," आजकल तो लूट मचा रखी है वकील लोगों ने। हर तारीख पर फीस दो।"


" नहीं फलेगा उनको। कहीं ना कहीं निकलता है, ऐसी- ऐसी बीमारी लग जाती हैं कि सब खजाने खाली हो जाते हैं। उतना ही खाना चाहिए जितना दूसरे आदमी का दिल न दुखे। जमीनें बेच कर लोग मुकदमा लड़ते हैं। महिलाओं के जेवर घर के बर्तन तक बिक जाते हैं। नाजायज लेंगे तो बद्दुआ तो लगेगी ही।"वकील साहब बोले।


तभी तीसरे ने कहा," वकील साहब ! आजकल तो हर चीज में मिलावट आ रही है शराब में भी मिलावट है। कितने लोग मर जाते हैं मिलावटी शराब पीकर।"


चौथी सवारी जो अभी तक चुप थी , बोली ,"सरकार ने भी तो जगह-जगह ठेके खोल दिए हैं। उसे भी तो राजस्व मिलता है। पर जनता तो बर्बाद होती है भाई साहब ! यह बंद नहीं हो सकती क्या ? "


वकील साहब बोले," बंद तो कल हो जाए अगर लोग पीना छोड़ दें। कुछ पैसा है तो बच्चों को पढ़ाओ, लिखाओ । उनका भविष्य सुधारो और जमीन जायदाद बना लो आगे काम आएगी।"


 तभी बगल में बैठे एक मजदूर जैसे सज्जन, जिसके खिचड़ी बाल अव्यवस्थित दाढ़ी और कमजोर शरीर था ,ने कहा ,"भाई साहब ! आप मिलावट की बात करते हैं। मैं तो कहता हूंँ नकली शराब आ रही है बाजार में। उसमें केमिकल होता है, शरीर को खा जाती है। मैं तो एक बार एक फैक्ट्री में चला गया था । समझ लो भगवान ने भेज दिया था। मैंने वहांँ देखा उंगली भर की गिराड़ उतरा रही थीं शराब के ड्रामन में। मैंने तो बाई दिन से छोड़ दी। अच्छो भयो मेई तो आंखें खुल गईं।"


वकील साहब बोले," ठीक किया उसकी जगह कोई ताकत की चीज खाओ। बहुत सी चीज हैं खाने की । शराब तो आदमी को ही खा जाती है । शरीर कोई पत्थर का तो है नहीं । बड़े ही नाजुक अंग होते हैं इंसान के। सब गला देती है शराब।


 अन्य सवारी ने बात को जारी रखते हुए कहा,"भाई साहब! जनसंख्या बहुत बढ़ रही है । सरकार के संभाले संभल नहीं रही । सरकार भी चाहती है ,लोग शराब पी -पी कर मर जाएं और जनसंख्या नियंत्रण में आ जाए क्यों ठीक है ना।"


ड्राइवर के बगल में बैठी सवारी आगे से बोली," भगवान ने अकल ना दी क्या , इंसान को दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए कि नहीं ?”


 मजदूर व्यक्ति बोला," आजकल के बच्चा मैया -बाप के कहने में नाएं। कोई कहना मानता नहीं। मां -बाप को तो कछु समझतई नाएं । हमारे मालिक को लड़का है । बाने बैंड बाजे बालन के संग झुनझुना बजाएवो शुरू कर दयो। बेई झुनझुना जो शादी में बजावत हैं। अब बताओ कौन बाते शादी करैगो। मालिक चाहत है की गाड़ी चलाएवो सीख ले ,पर बाकी समझ में नाएं आवत। घर पे गाड़ी खड़ी है ,बाप ड्राइवर है । पढनो सीख लेतो। नाय पढ़ो तो, गाड़ी चलावतो । बाप को नाम खराब कर रह्यो। शादियन में झुनझुना बजाएवो अच्छो लग रह्यो है।"

 अन्य सवारी , "जब पढ़ेंगे नहीं तो वही करेंगे ,जो कर पाएंगे। पाँच हजार रुपए तो मिलते ही होंगे। जाते ज्यादा पढ़े-लिखे को भी ना मिल रहे।"


"हाँ पाँच हजार मिल जाते हैं और खाना पीना भी मिल जावे है। वो बाई में खुश है।"


मेरे साथ बैठी स्त्री मेरे कंधे पर सिर रखकर आराम से सो रही थी और मैं सतर्क थी । कहीं यह बैग साफ करने वाली ना हो। क्योंकि घटनाएं आए दिन अखबारों में छपती रहती हैं। बहुत ही साधारण सांवली और सजी-धजी थी। पैरों में तीन-तीन बिछिए और हाथों में रंगीन चूड़ियां पहने हुए, लाल रंग की साड़ी में एक विशुद्ध भारतीय नारी प्रतीत हो रही थी। एक झोला उसकी गोद में रखा था। देखने में नर- नारी जैसा हुलिया था कुछ कुछ,पर शुक्र है कि वह वैसी नहीं थी जैसा मैं सोच रही थी। मेरा बैग सुरक्षित था और यात्रा भी सुरक्षित रही।



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