ख़तों का सुनहरा दौर (3)
ख़तों का सुनहरा दौर (3)
एक ख़त बड़ी बहन का छोटी बहन के लिए
मेरी प्यारी बहन नित्या
मुझे यक़ीन है अपने नए संसार में भी तुमने बहुत जल्द सबका दिल जीत लिया होगा अपने हँसमुख और मिलनसार स्वभाव से। सभी तुमसे बेहद प्यार भी करते होंगे और सभी का तुम और सभी तुम्हारा ख्याल भी रखते होंगे जिसकी तुम हक़दार हो।
वैस तो तुम्हारे ससुराल वाले सभी बहुत अच्छे स्वभाव के हैं और काफ़ी पढ़े - लिखे भी। सारे काम दिनचर्या से चलते होंगे जो सुगम जीवन का आधार होता है। यह सब बहुत अच्छा लगता है सबके साथ नास्ता करना, खाना खाते हुए हँसी ठहाके भरा माहौल और दिनभर की मजेदार बातों का अनुभव पूरे परिवार के साथ साझा करना।
मेरी नित्या तुम बहुत सहजता से इसका हिस्सा बन जाओगी और फिर ये बातें जीवन में सुमार हो जाएंगी।लेकिन, इन बातों और रिश्तों के बीच तुम अपनी जगह धूमिल मत होने देना नित्या। जो गलतियाँ मैंने की हैं वह तुम मत करना मेरी बहन।
मैं एक आदर्शवादी बहु और पत्नी बनते - बनते, सबका ख्याल रखते - रखते, सबकी पसंद और इच्छा का ध्यान रखते हुए खुदको भुला बैठी। सबकी पसंद का खाना बनाते हुए अपनी पसंद के भोजन का स्वाद भूल गई। सबके लिए तोहफ़े खरीदती रही और धीरे - धीरे सब मेरा ही जन्मदिन भुला बैठे। घर की सारी बतियाँ बन्द करने के साथ ही अपने सपनों का झरोखा भी कहीं खो दिया।
सब्जियों का थैला ढोते हुए अपनी खुशियों की गठरी ही छोड़ दिया कहीं मेरी बहन। सबसे कहती रहती हूँ, मैं ठीक हूँ, खुश हूँ। लेकिन, रिश्तों के सहारे पर अपनी पहचान ढँक गई। अब तो सिर्फ एक पत्नी, बहु, भाभी , ननद और माँ से अलग कोई पहचान नहीं है। कितना भरोसा था पापा को, माँ को मेरी काबिलियत पर कि,एक दिन मैं इन परिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी परिवार और समाज के लिए कुछ अच्छा करुँगी । इस विकाशशीलता का हिस्सा बनूँगी। लेकिन मैं सुख सुविधाओं से निकल कुछ करने का हौसला ना जुटा पाई और अब देखो मेरी दशा।
मेरी नित्या मेरी एक ही दिली ख्वाहिश है कि, रिश्तों के बीच तुम अपना वजूद मत खोने देना। अपनी पढ़ाई जैस पुरी की वैसे ही अपनी पहचान जरूर बनाना सिर्फ अपने लिए नहीं सबके लिए। सबका मान - सम्मान बढ़ाना और समाज का दिल जीत लेना अपने उत्कृष्ट कार्य से नित्या यही मेरी आशा और आशीर्वाद है तुम्हारे प्रति।
जीवन के किसी मोड़ पर अपनी बड़ी बहन कि जरूरत हो सोचना मत बस एक आवाज़ लगा देना।मैं हर संभव सहायता करने के लिए तैयार हूँ।
तुम्हारी दीदी
अपर्णा
