Priyadarshini Kumari

Children Stories Horror


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Priyadarshini Kumari

Children Stories Horror


ख़ौफ़नाक जंगल

ख़ौफ़नाक जंगल

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मानसी ठाकुर अपने नये घर में शिफ्टिंग के लिए आती है। और अपने नौकर से कहती है, "चलो सुखिया जल्दी करो,, समान उतार दो शाम भी होने वाली है। बच्चों को भूख भी लगी हुई है"। 

"जी मालिकन बस हो ही गया"। 

"अच्छा सुखिया तुमनें सभी कमरें साफ कर दिया ना"

" जी मालकिन हमनें तो सभी कमरें साफ कर दिए और रसोई में भी बच्चों के खाने के लिए भोजन भी बना दिया है। लेकिन मालकिन, साहब ने शहर से इतनी दूर घनी जंगलों के पास ही बंगला क्यूं लिया ? ! यहाँ तो हर पल ही एकांत माहौल रहता है। ना कोई आता है, और नाही कोई जाता है। बच्चों को भी शायद मन ना लगेेे"। सुखिया अपनी मालकिन मानसी से कहता है। 

" हां इसीलिए तो लिया साहब ने, क्योंकि उन्हें एकांत जगह ही पसंद है ? "। 

  सुखिया धीमे आवाज में मानसी से कहता है, "जी मालकिन ठीक है"। 

अच्छा मालकिन ये बताये साहब कब तक आएंगे "। 

"उनको आते आते शायद रात के नौ बज जायेंगे। 

अच्छा तुम बंटी और बबली को कमरा दिखा दो और दोनों को खाना भी खिला देना। उसके बाद मेरे लिए एक कप चाय बना कर ले आना तब तक मैं, अपने कमरे में हूं"। 

 "  जी मालकिन ठीक है,, आप जाए और अपने कमरें में आराम करिये "। सुखिया अपनी मालकिन को कमरें में आराम करने के लिए कह देता है। फिर सुखिया बंटी और बबली को उनके कमरें में ले जाते हैं। दोनों बच्चे नये घर में आकर बहुत ही खुश थे। दोनों को सुखिया खाना खिला देता है। और दोनों बच्चों को उसके खेलने की कमरें भी दिखा देता है। और उस कमरें में एक दरवाजा होता है जो थोड़ी गन्दी और डरावनी भी दिख रही थी। सुखिया बच्चों से बोलता है, "बंटी और बबली इस दरवाजे को कभी भी मत खोलनाठीक है, अब मैं जाता हूं। उपर रसोई घर में तुम्हारी माँ के लिए चाय बनाने"। 

  बंटी और बबली दोनों ही खुश होते हुए बोल देते है, " हां हां सुखिया अंकल आप जावो। हम दरवाजे नहीं खोलेंगे"। 

  दोनों बच्चे खेलने में मशगूल हो जाते हैं। तभी चई ची ईई ची ऊ उई ई ची,,की आवाजें सुनाई देती है,,। 

डरावनी आवाजे सुनकर बबली डर जाती है,, फिर दरवाजे जोर जोर से खटखटाने की आवाजे भी होने लगती है। 

आवाजें सुनकर बंटी बोलता है,, कौन है ? कौन है ? बबली बोलती है, "भाई चल मम्मी के पास मुझे डर लग रहीं हैं"। 

"चुप कर बबली तू, तो बस डरती रहती है"। 

बंटी दरवाजे को खोल देता है। दरवाजे खुलते ही बड़ी बड़ी बादुर और भयानक भयानक कीड़े मकोड़े भी घर के अंदर आने लगते हैं। और एक तेज बहती हवा सन्नननन से दोनों को उसी दरवाजे के अंदर एक खौफ़नाक जंगलों में ले जाता है। बंटी और बबली के आंखों के सामने एक खौफ़नाक जंगल होती है जिसमें सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा होता है। दोनों बच्चे बहुत ही डर जाते हैं,, तभी उनके सामने एक बड़ी सी लंबी बालों वाली दो मुँहेचुड़ैल आती है जिसकी आंखें लाल लाल, बहती खून जैसा और पूरे बदन पर काली काली धब्बों का गहरी निशान,, बेहद ही बदबूदार,, खौफ़नाक दिख रही थी। 

बबली तो देखते ही वहीं बेहोश हो गई और बंटी को वह चुड़ैल ने पकड़ लिया। 

मानसी,, अपनें कमरें में आराम कर रही थी,, तभी बड़ी बड़ी बादूरों को घर में प्रवेश करते देख बहुत ही डर जाती है, " हेय ये क्या है ? । सुखिया,, सुखिया कहाँ हो ? जल्दी आवो"। 

" जी मालकिन क्या हुवा ?"। 

 "ये सब क्या है ? सुखिया बच्चे ठीक है ना"। 

सुखिया बादूरों को देख समझ जाता है कि दरवाजे बच्चे ने खोल दिए हैं। और सुखिया, मानसी से चिल्लाता हुवा बोलता है, "मालकिन जल्दी चलिए बच्चों के पास, बच्चों को बचाने वरना अनर्थ हो जाएगा"। 

" सुखिया,, तुम क्या बोल रहे हो अनर्थ हो जाएगा! मेरे बच्चे तो ठीक है ना"। 

  " मुझे नहीं पता मालकिन, पर अभी तक दोनों ही सुरक्षित होंगे बस आप जल्दी से चलो। मैं जैसे जैसे बोलता हूं, आप वैसे ही करो। आप अपने हाथ में एक जलती हुई मशाल पकड़े। और मैं लालटेन और एक नुकीली हथियार भी ले लेता हूं"। 

" पर ये सब क्यूं ? सुखिया"। 

"मालकिन बच्चों को बचाने के लिए। बच्चे हमारें मुसीबत में है। मालकिन बच्चों के खेलने के

कमरें में एक दरवाजा है। जिसे खोलने के बाद सीधे ही खौफ़नाक जंगल में जाते हैं और बंटी,,बबली भी वहीं चले गये है और उस खौफ़नाक जंगलों में बहुत सारे कई सालों से भूखे राक्षस,, चुड़ैल,, पिशाच और भी कई खतरनाक जंगली जानवर है। जो बस खून ही पीना चाहते हैं इंसानों की।

"ठीक है सुखिया जल्दी चल"। 

 सुखिया भूतियां दरबाजे पर देवी माँ की तस्वीर लगा देता है। 

"ये किसलिए सुखिया"

"मालिकन ताकि ये दरवाजा खुद ही बंद ना होऔर हम सब सही सलामत खौफ़नाक जंगल से वापस आ जाए"। 

 दोनों खौफ़नाक जंगल में अंदर चले जाते हैं। वहाँ की दृश्य देखकर दोनों की डर के मारे रूह कांप जाती है। अजीब गंदी बदबू,, जैसे कई दिनों से कोई लाश सड़ रहीं हो। 

च उ ई ची चीकी आवाजें उन्हें और भी डरा रहीं थी। 

तभी मानसी,, बंटी को एक पेड़ पर लटके हुए देखती है। 

मानसी,, बंटी को उतार कर अपनें सीने से लगा लेती है।  बंटी के बदन पे बहुत से काटने के निशान थे जिससे उसे बेहद ही दर्द महसूस हो रहा था। और बबली भी वहीं बेहोश पड़ी थी,, बबली को बेहोश देखकर,, मानसी रोने चिल्लाने लगती है। 

" मालिकन चुप हो जाइए मत रोइए मत चिल्लाए.. वरना मुश्किल हो जाएगी यहाँ से बच के जा पाना। वे सभी अपनें दोस्तों को बुलाने के लिए गया हो शायद इसीलिए ,,बंटी और बबली अकेले है"। 

" हां आ सुखिया ,,तुम सही बोल रहें हो"। 

 सुखिया बबली को गोद में उठा लेता है। सभी दबे पांव वहाँ से धीरे धीरे दरवाजे के पास आ जाता है। तभी किसी ने सुखिया के हाथ पकड़ लेता है। सुखिया चिल्लता है, " मालिकन आप बच्चों को लेकर दरवाजे बंद कर ले"। 

 मानसी अपनी हिम्मत से पहले दोनों बच्चों को जल्दी जल्दी अंदर की तरफ धकेल देती है। और अपने हाथों में ली हुई मशाल से उस सुखिया को भी बचा लेती है और जल्दी से खौफ़नाक जंगल के दरवाजे को बंद कर देती है। 

इस तरह सुखिया और मानसी मिलकर बच्चों को बचा लेते है। 


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