शिखा श्रीवास्तव

Children Stories


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शिखा श्रीवास्तव

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जश्न आज़ादी का

जश्न आज़ादी का

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सुहाना बड़ी ही प्यारी सी बच्ची थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। उसने घर में कई जानवर पाल रखे थे जिनमें तोता, कुत्ता और दो सुनहरी मछलियां शामिल थी।एक शाम सुहाना अपने बगीचे में बैठी मूंगफली खा रही थी। तभी पेड़ से उतरकर एक गिलहरी वहां आयी और सुहाना को देखने लगी। सुहाना ने उसे मूंगफली के दाने दिए तो वो कुटकुट करके खाने लगी।ये देखकर सुहाना खुशी से ताली बजाने लगी।

अब ये सुहाना का रोज का खेल हो गया। वो रोज गिलहरी को मूंगफली खिलाती और गिलहरी खुश होकर उसके चारों तरफ चक्कर काटती।एक शाम सुहाना की माँ 'सोनाली जी' भी उसके साथ बगीचे में बैठी हुई थी।

सुहाना ने कहा "देखो मम्मा, गिलहरी मूंगफली खाकर कितनी खुश होती है और कैसे मेरे चारों तरफ़ चक्कर काटती है।"

सोनाली जी बोली "अरे वाह गिलहरी तो सुहाना की दोस्त बन गई है।"

सोनाली ने फिर पूछा "इसे भी तुम पिंजरे में क्यों नहीं रखती हमेशा अपने पास?"

सुहाना ने भोलेपन से कहा "मम्मा पिंजरे में रखूंगी तो ये मेरे चारों तरफ कैसे दौड़ेगी?"

"बिट्टो रानी, इस गिलहरी की तरह ही बाकी जानवरों का भी मन करता होगा ना पिंजरे से निकल कर उड़ने का, घूमने का, अपने जैसे दोस्तों के साथ रहने का, जैसे तुम घूमती हो, अपने दोस्तों से मिलती हो।" सोनाली ने समझाने के अंदाज में कहा।

नन्ही सुहाना समझ रही थी कि उसकी मम्मा क्या कहना चाह रही है।

उसने कहा "हाँ मम्मा, ये तो मैंने सोचा ही नहीं। मैं अभी सबको खोल देती हूँ।"

फिर सुहाना ने तोते का पिंजरा खोल दिया, अपने कुत्ते की जंजीर भी खोल दी, और सोनाली जी के साथ जाकर मछलियों को पास के तालाब में डाल आयी।सुहाना को उनकी याद आ रही थी लेकिन वो खुश भी थी।

उसने गिलहरी को मूंगफली खिलाते हुए कहा "तुमने मुझे बहुत अच्छा पाठ सिखाया दोस्त। तुम्हारा धन्यवाद।"

थोड़ी ही देर में गिलहरी के साथ-साथ सुहाना का तोता और कुत्ता भी अपनी आवाज़ में खुशी जताते हुए उसके चारों तरफ चक्कर लगाते हुए उसके साथ खेलने आ गए।सुहाना कागज के हवाई-जहाज बनाकर उन्हें आसमान में उड़ाते हुए, उन सबके साथ मिलकर आज़ादी का जश्न मना रही थी।


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