जोर लगाकर खोदत है
जोर लगाकर खोदत है
अगले दिन जब आरुष की दादी और कुन्नी की नानी से कहानी सुनाने का आग्रह किया तो गोदावरी जी ने भी थोड़े ना नुकर के बाद कहानी सुनाना शुरू कर दिया। एक बार की बात है एक राजा के खजाने पर दो चोरों की नजर थी। वह दोनों चोरी करना चाहते थे। एक का नाम था गोलू और दूसरे का नाम था मोलू । एक रात दोनों चौकीदार जब सो रहे थे तो, गोलू और मोलू चुपके से महल में प्रवेश कर गए और जाकर राजा के खजाने में सेंध लगाकर कोड़ने लगे। उनके खोदने की आवाज जब जोर जोर से आ रही थी तभी दोनों चौकीदार रामू और श्यामू में से एक ने कहा....
" लगता है ... कोई कहीं जोर लगाकर खोदत है !" गोलू और मोनू को लगा कि चौकीदार ने उन्हें देख लिया है यह साल यह दोनों बिल्कुल चुप लगा कर बैठ गए तब उन दोनों ने बातचीत किया। पहले चौकीदार रामू ने कहा,
" मैंने कहा था ना .... ई कोई जोर लगाकर खोदत है !"... इस पर गोलू और मोनू बिल्कुल चुप लगा कर बैठ गए उन्हें लग रहा था कि शायद दोनों चौकीदारों ने उन्हें देख लिया है।
तभी दूसरे चौकीदार ने कहा...." हां भाई ....मुझे भी ऐसा ही लग रहा है। अब देखो चुप्पी लगाकर बैठत है !" बस.... फिर क्या था। दोनों खजाना चोरी करना छोड़ कर के सरपट भागने लगे।और उनके पैरों की आवाज से चौकीदारों ने उन्हें पकड़ लिया और राजा के पास पहुंचा दिया।
रामू और श्यामू की सतर्कता से गोलू और मोलू दोनों चोर पकड़े गए और राजा ने दोनों चौकीदारों को इनाम दिया।
गोदावरी जी ने जैसे ही कहानी खत्म की तो बच्चे ताली बजाने लगे।
तो गोदावरी जी ने कहा,
" बच्चों, यह तो बताओ कि इस कहानी से शिक्षा क्या मिलती है ? "
सारे बच्चे एक साथ बोले....
चोरी नहीं करना चाहिए।
गोदावरी जी ने कहा....
" शाबाश.... अब अगली कहानी....अगले दिन। अब सब बच्चे सो जाओ।
