हरा भरा पेड़
हरा भरा पेड़
चुन्नू के घर के सामने एक बड़ा सा आम का पेड़ था । उसका ज्यादातर समय इस पेड़ के साथ ही बिताता था।कभी डाली से खेलता....कभी चढ़कर उसी डाली पर घंटों झूलता रहता..। इसी पेड़ से वह खूब बातें करता.... हंँसी ठिठोली करता...मानों वह पेड़ इसकी बातें सुन रहा हो और इसके मन के भावों को बखूबी समझ रहा हो। चुन्नू के मन की भावनाएं इस पेड़ के जड़ों से बंधी हुई थी। वह पेड़ भी मौसम आने पर अपने खूब मीठे मीठे आमों से चुन्नू को खुश कर देता और वह इन मीठे आमों को खाकर खूब आनंदित रहता।
एक दिन चुन्नू ने देखा इस पेड़ पर चिड़िया ने घोंसला बनाया है...और उसमें दो अंडे हैं। अब तो उसकी खुशी का ठिकाना ही नहीं ।अब तो वह इन अंडों के फूटने का इंतजार करने लगा। जिसमें से दो नए मेहमान का आगमन होगा और वह इन छोटे चिड़ियों के बच्चों को देखकर बहुत खुश होगा।
आखिरकार वह दिन आया और अंडे फूटे और उसमें से दो छोटे-छोटे चिड़ियों के बच्चों ने अपनी चोंच निकालकर इस नई दुनिया को देखा और यह पूरा सुहावना दृश्य चुन्नू के आंँखों के आगे ही हो रहा था। वह तो मानो किसी और दुनिया में ही खो गया था। घर आकर उसने अपनी मांँ और पिताजी को सारी बात बताई और वो खुशी से झूमने लगा।
चुन्नू इस आम के पेड़ की बड़ाई पूरे गांव में सबसे करता रहता और अपने स्कूल में इस पेड़ की रोचक बातें अपने सहपाठियों को बता कर कभी खुश कर देता कभी आश्चर्यचकित कर देता..। जिससे उसके मित्र भी इस पेड़ को देखने आते और मीठे आमों को खा कर बहुत खुश हो जाते।
अचानक एक दिन चुन्नू के पिताजी ने अपने पुराने जर्जर घर को नया बनाने के लिए इस पेड़ को काटने का मन बना लिया । पेड़ कट जाने से बड़ी जगह हो जाएगी और बड़ा आधुनिक घर बन जाएगा। इस बात की खबर चुन्नू को लगते ही वह अपने पिताजी को पेड़ ना काटने के लिए मनाने लगा ।
लेकिन उसके पिताजी एक भी ना माने ।चुन्नू भी अपनी जिद पर अड़ गया । वह अपने पिताजी से कहने लगा... "आपको पेड़ काटने की क्या जरूरत है ..इसी घर को नया बना दीजिए । घर बड़ा या छोटा होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसमें केवल प्रेम प्यार हो बस ।" चुन्नू के मुंँह से यह बात सुनकर उसके पिताजी भाव विह्वल हो उठे ..बाल मन की बातें उसके पिताजी को भा गई । लेकिन चुन्नू की बातें अभी रुकी नहीं ..। उसने कहा ..."पिताजी यह पेड़ हमें फल देता है ,...ऑक्सीजन देता है ..इस पर कितने ही चिड़ियों के घोंसले ने अपने छोटे से घर का आसरा बनाया है..।"
'"यदि हम इसे काट देंगे तो बहुत बड़ा पाप होगा ।इस पर चुन्नू के पिता जी रो उठे और चुन्नू को अपने हृदय से लगा लिया और प्रण कर लिया कि अब वह इस पेड़ को कभी नहीं काटेंगे और अपने जीवन में कई और पेड़ लगाएंगे ।जो इस धरती मांँ को उपहार होगा...।"
निष्कर्षः
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें धरती पर हरियाली रखने के लिए पेड़ काटने नहीं अपितु और नए नए वृक्ष लगाने चाहिए जिससे धरती की हरियाली बनी रहे यह हमारा धरती मांँ को अपनी ओर से दिया गया सुंँदर उपहार होगा। आज चुन्नू की जिद ने एक पेड़ को बचा लिया और हम सब को यह नई सीख दे दी की अपने जीवन में जरूर वृक्षों को लगाकर नेक और पुण्य कार्य करें।
पेड़ लगाओ।
धरती बचाओ।।
