Shobhit शोभित

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5.0  

Shobhit शोभित

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गँवार

गँवार

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“कल से तुम सबसे आगे बैठोगे.” मेरी अध्यापिका मुझे कह रही थी।

उनसे डांट खाना मेरा जैसे रोज का ही काम हो गया था।

मैं यहाँ, दिल्ली, अपने छोटे से शहर राजनगर से कंप्यूटर की पढाई करने आया था, कभी बाहर इतना घूमा फिरा नहीं था एक अनजाना सा डर रहता था,यहाँ अंग्रेज़ी में सब गिटर पिटर करते थे तो सबसे घुलने मिलने में थोडा असहज था और सहपाठी मुझे कोई गँवार समझते थे. हालाँकि मैं पढाई में कमज़ोर नहीं था पर मेरा व्यक्तित्व मेरा साथ नहीं देताथा।

खैर! जैसे तैसे समय बीत रहा था और हमारी परीक्षा का समय नजदीक आ रहा था और हमारी अध्यापिका का हमें डांटना बढ़ता ही जा रहा था. घर पर मेरे पास कंप्यूटर था नहीं और क्लास में अध्यापिका अपने अनुसार ही काम करने देतीथी।

खैर लगातार डेढ़ महीने की पढाई के बाद परीक्षा का दिन आ ही गया ,मैं बहुत रोमांचित था यह सुनकर की परीक्षा कंप्यूटर पर ही होगी और रिजल्ट भी हाथ के हाथ ही मिल जायेगा।

सब लोग अलग अलग कंप्यूटर पर परीक्षा दे रहे थे और मैं लगभग सभी प्रश्नों के उत्तर दे चुका था. केवल 2 सवाल बाकि थे. तब तक दो चार लोग परीक्षा पूरी कर चुके थे और अभी तक के सर्वाधिक नंबर 95 थे और सबको उम्मीद थी कि इससे ज्यादा नंबर संभव ही नहीं. इस बीच मैंने एक और सवाल का जवाब दे दिया था और केवल एक सवाल रह गया था।

तभी हमारी अध्यापिका मेरे पास आकर खड़ी हुई और मुझे बड़ी ही धीमी आवाज़ में उस अंतिम सवाल का जवाब बताने लगी,मैं उनके जवाब से संतुष्ट नहीं था और मैंने एक दूसरे जवाब को चुना था. हालाँकि अभी इसे अंतिम जवाब के तौर पर नहीं चुना था. उन्होंने एक बार फिर मुझे जवाब बदलने के लिए बोला, मैंने उनको देखा पर जवाब बदला नहीं. परीक्षा का समय था वो ज्यादा कुछ कह नहीं पाई पर गुस्से में दूर चली गयी ये कहते हुए कि “अगर तुम फ़ेल हुए तो देखना!”

अभी भी परीक्षा में 10 मिनट का समय बाकि था पर एक दुसरे टीचर मेरे पास आए और कहा कि अगर अपने सभी सवालों के जवाब दे दिए हैं तो कृपया इसे सबमिट कर दीजिये. मैंने उनसे ऐसा करने को कहा.

“क्यों? डर लग रहा है? जवाब बदलना है?”

“नहीं, जवाब तो नहीं बदलना है".

“तो फिर आँखें बंद करके भगवान से प्रार्थना करो”

उन्होंने तो शायद मजाक में कहा था, पर मैं सच में भगवान से प्रार्थना करने लगा कि भगवान फ़ेल मत करवाना।

“बधाई हो. पूरे 100 में 100 आए हैं.”

इधर मैं आँखें फाड़े फाड़े कंप्यूटर को देख रहा था, समझ नहीं पा रहा था कि ख़ुशी से चिल्लाऊँ या नाचने लगूं. भगवान् का शुक्र था कि मैंने अपने जवाब को ही सही माना था।

पूरी क्लास मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मेरे सर पर सींग उग आए हों।

मैं बस इतना ही बोल सका

“मैम, सब आपकी कड़ी मेहनत का फल है.”


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