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Shailaja Bhattad

Others

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Shailaja Bhattad

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दस

दस

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"इतनी उदास क्यों बैठी हो श्रिया, क्या बात है, किसी ने कुछ कहा क्या"? श्रिया की मां देविका ने चिंता के भाव से पूछा। "देखो न मां, इतना अच्छा उत्तर लिखने के बाद भी पांचवें प्रश्न के उत्तर में अध्यापिका ने मुझे शून्य अंक दिया है।" श्रिया ने बताया। देविका की चिंता अब और अधिक बढ़ गई, लेकिन अपने भाव को छिपाते हुए, श्रिया से कहा- "आज जब 10:00 बजे ऑनलाइन कक्षा शुरू होगी, तुम अपनी अध्यापिका से स्पष्टीकरण ले लेना, और अपने उत्तर का स्क्रीनशॉट भी कक्षा में साझा कर लेना, ताकि अध्यापिका तुम्हारा उत्तर जान सके। नियत समय पर जैसे ही कक्षा शुरू हुई, अध्यापिका ने सभी विद्यार्थियों के साथ एक स्लाईड साझा की, और कहने लगी पाँचवें प्रश्न का यह उत्तर सर्वोत्तम है। मुझे नाम तो नहीं पता लेकिन जिस भी विद्यार्थी ने इसे लिखा है वह बधाई का पात्र है। अपने उत्तर को स्क्रीन पर देखकर श्रिया हैरान रह गई और तुरंत अपने उत्तर का स्क्रीनशॉट साझा कर अध्यापिका से कहा- "महोदया, यह उत्तर मैंने ही लिखा है, लेकिन आपने मुझे इस उत्तर के लिए शून्य अंक दिए हैं।" महोदया सहित पूरी कक्षा चौंक गई फिर ध्यान से देखकर अध्यापिका ने ग्लानि भाव से कहा- "मैं 10 अंक देना चाहती थी, लेकिन लगता है गलती से एक लिखना भूल गई।" "लेकिन यह तो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ न महोदया? वह तो अच्छा हुआ कि एक ही प्रश्न के उत्तर में आपने भूलवश शून्य लिखा है, अगर इस विषय के कुल अंक शून्य लिख दिए जाते, तो आज श्रिया मुसीबत में पड़ जाती न।"- देविका अपने आपको रोक न सकी और कक्षा में ही बोल पड़ी। "जी, मैं माफी चाहती हूं, अगली बार से मैं सबकी उत्तर पुस्तिका दो बार जांचूँगी ताकि फिर कोई गलती न हो।"-अध्यापिका ने दुःख भरी आवाज में कहा।

श्रिया ने बात संभालते हुए तुरंत कहा- " महोदया, मैं माफ़ी चाहती हूँ इस तरह मेरी माताजी के कक्षा के बीच में बोलने के लिए।"

"नहीं, कोई बात नहीं, मैं इनकी तकलीफ समझ सकती हूँ।" अध्यापिका ने कहा।


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