चमत्कार ऐसा भी होता है

चमत्कार ऐसा भी होता है

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"क्या हुआ माही तुम ऐसे क्यों लेटी हुई हो?"

"पता नहीं क्यों अचानक से पेट में दर्द शुरू हो गया!"

"कहता हूँ कि बाहरी चीजें मत खाया करो, पर तुम्हें तो बाहरी चाट फुल्की खाने का बस मौका मिल जाए। ये लो दवा खालो, आराम मिल जायेगा।"

माही के पेट में दर्द समय पर रहने लगा। मनिक कहता कि "चलो एक दिन डाक्टर को दिखा दूँगा।" कभी ये काम कभी वो काम तो कभी मीटिंग के चक्कर में दो महीने बीत गए। एक दिन माही के पेट में दर्द इतना बढ़ा कि उसे एडमिट कराना पड़ गया। फिर डॉक्टर ने कई जांच लिखी।

आज माही की रिपोर्ट आने वाली थी। मनिक ने जब रिपोर्ट देखा तो खुद को संभाल ही नहींं पाया। उसे लास्ट स्टेज का कैैंसर है। देखिए "मनिक जी" अब "माही जी" को बचाना मुश्किल है। उनके पास ज्यादा समय नहीं है।

"डॉक्टर आप ऐसा नहीं कह सकते मेरी माही को कुछ नहीं होगा, मैं उसे कुछ नहीं होने दूँगा।"

"काश मैं उसे बचा पाता पर अब कुछ नहीं हो सकता। आपने आने में बहुत देर कर दी।"

रिपोर्ट लेकर मनिक सीधे मंदिर जाता है। वहां भगवान के सामने रोने लगता है और कहने लगता है, "क्या कमी की थी माही ने आपकी पूजा में, हर दिन वह आपको भोग लगाकर तब ही खाती थी। कोई त्योहार पड़े अपने भगवान जी को सबसे पहले चढ़ावा चढ़ाती थी। आप उसके साथ क्यों अन्याय कर रहे हैं? क्यों भगवान क्यों? ग़लती मेरी है मुझे सजा दीजिए, उसे क्यों सजा दे रहे हैं? दो महीने से पेट में दर्द हो रहा था। अगर मैं पहले डॉक्टर के पास ले जाता तो शायद अपनी माही को मैं बचा पाता। काश मैंने देर ना की होती।" खुद को बार बार कोस रहा था मनिक।


बहुत देर तक वह मंदिर की सीढियों पर बैठा रहा, हिम्मत ही नहीं हो रही थी घर जाने की क्या कहूँगा अपनी माही से। थोड़ी देर बाद घर पहुँचता है।

"आप इतना लेट क्यों आये? और रिपोर्ट मिली? क्या निकला था रिपोर्ट में?" लगातार सवाल कर रही थी माही। 

"तुम्हारी रिपोर्ट में...."

"आप क्या बताओगे? मुझे पता है कि मुझे कुछ नहीं होगा। सही कहा ना? बस पता नहीं कहाँ से ये पेट में दर्द शुरू हो गया था। आप मुंह हाथ धो लो, मैं खाना लगाती हूँ।"

वह माही को बताना नहीं चाहता था। उसने अपने आँसुओं को रोक कर रखा। 

अगले दिन "तुम कह रही थी ना वैष्णो देवी जाने को, कल ही हम चलेंगे दर्शन के लिए। "

"क्या बात है कल से देख रही हूँ, मेरे उपर कुछ ज्यादा प्यार उमड़ रहा है। मैं कुछ भी कह रही हूँ मान जा रहे हैं, बात क्या है?"

मनिक ने बात काटते हुऐ कहा , "तुम पत्नियों को तो शक की आदत होती है। अच्छा अब चलो तैयारी कर लो।"

अगले दिन वह वैष्णो देवी के दर्शन के लिए निकल पड़े। वहां पहुँच कर उसने नंगे पाँव चढ़ाई शुरू की, माता रानी से मनिक बस यही प्रार्थना करता कि "माँ कुछ ऐसा चमत्कार कर दे कि मेरी माही मुझे छोड़कर ना जाये। मैं जी नहीं पाऊंगा उसके बिना, मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूँ।"

दर्शन करके घर आया तो मनिक को हॉस्पिटल से फोन आया कि माही जी की रिपोर्ट बदल गई थी। जो रिपोर्ट आपके पास है वह माही जी की नहीं है।

"सच कह रहे हैं आप?"

"हां जी, ये बिलकुल सही हैं। आप हॉस्पिटल आकर सही रिपोर्ट ले जाएँ।"

"तो क्या माही की रिपोर्ट नार्मल है?"

"नहींं, माही जी को कैंसर नहीं पर पेट मे स्टोन है। जो डरने वाली बात नहीं। कुछ महीने दवा रेगुलर करेंगे तो स्टोन गल कर निकल जायेगा।"

"मतलब अब मेरी माही को कैंसर नहीं है?" मनिक की खुशी का ठिकाना नहीं था। ये तो वैष्णो माता का ही चमत्कार है। वह मंदिर में जाकर माता रानी का शुक्रिया करता है।

पिछले एक हफ्ते में माही को खो देने का डर जो था मन में, आज उससे मुक्ति मिल गई थी। और एक सबक भी कि "कभी भी शरीर के किसी अंग के तकलीफ़ को अनदेखा ना करें। कहीं बाद में बीमारी विशाल रूप ले ले तो बस पछताना ही पड़ेगा।"

"जब दर्शन करने गए थे, तो आप बड़े दुखी लग रहे थे और आज आप बहुत खुश लग रहे हैं। आखिर बात क्या है?"

मनिक ने उसे गले लगा लिया। आप तो मुझे ऐसे गले लगा रहे थे जैसे मैं आपको छोड़ कर जाने वाली थी। मनिक ने माही के होंठ पर हाथ रखकर कहा कभी मुझे छोड़कर जाने की बात मत करना।

आप मानो या ना मानो पर जीवन मे कुछ ऐसी घटनाएं होती है जो चमत्कार से कम नहीं लगती।



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