Dr Jogender Singh(jogi)

Children Stories


4.4  

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छछून्दर डॉट कॉम

छछून्दर डॉट कॉम

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“अबे ! मैं तुझे नौकरी देता हूँ , करेगा ? ”प्रखर बोला ।प्रखर भारी बदन का पंद्रह साल का लड़का सब मिल कर बैडमिंटन खेल रहे थे । युगल खेलना मजबूरी थी , क्योंकि चार लोग खेल रहे थे और सात अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे ।

"जा बे ! तेरी कम्पनी में कौन नौकरी करेगा ।" रित्विक ने प्रखर को चिड़ाया । 

"बहुत अच्छी सैलरी दूँगा ।" प्रखर के साथ विभु , मिश्री , ज़ोया , अंगद , हनु , एंजल , राजीव , वरूण , नीआन सब हँस पड़े ।रित्विक को ग़ुस्सा आने लगा । 

प्रखर ने बात बदली “ राजीव को भी मैं नौकरी दूँगा , क्यों राजीव करेगा नौकरी ?" 

"कितनी सैलरी मिलेगी और कम्पनी कौन सी है ?" राजीव ने पूछा । 

"सैलरी —एक छछून्दर मासिक और कम्पनी का नाम है छछून्दर डॉट कॉम"सब ज़ोर से हँस पड़े ।

"मुझे दो छछून्दर चाहिए हर महीने" , राजीव मज़ा लेते हुए बोला । 

"नहीं — पहले ठीक से काम करोगे तब सैलरी डबल की जायेगी । और रित्विक को मैं सी॰ ई॰ ओ॰ बनाऊँगा और रित्विक का वेतन होगा तीस छछून्दर प्रतिमाह ।" घूम फिर कर बात फिर से रित्विक पर आ गयी । 

"सुन छछून्दर डॉट कॉम के मालिक पहाड़ी नेवले , तेरे जैसे बड़ी पूँछ वाले जानवर की मैं पूँछ काट दूँगा , फिर बनाना पूँछ कट डॉट कॉम ।" रित्विक ग़ुस्से से बोला ।

"सैलरी कम है ? ग़ुस्सा क्यों होता है ? मैं दूँगा तुम्हें चालीस छछून्दर हर माह । अब तो ख़ुश हो जा मेरे भाई ।"प्रखर ने मानो ज़िद पकड़ ली रित्विक को रुलाने की । 

"ग़लत बात है तुम लोगों की , क्यों रित्विक के पीछे पड़े हो ?" ज़ोया खेलते हुए बोली ।

"अरे दीदी , आप खेलने पर ध्यान दीजिये । हार गयी तो हटना पड़ेगा" , राजीव ने ठिठोली की ।

"मैं सोच रहा हूँ राजीव ज़ोया दीदी को अपनी कम्पनी में डॉक्टर बना लूँ । दीदी को मिलेंगे बीस छछून्दर प्रतिमाह। और इसी के साथ मिस ज़ोया दीदी बनती है डॉक्टर , हमारी कम्पनी की ।" प्रखर पूरी बदमाशी पर उतरा था ।

“ आँटी से आज तुम्हारी शिकायत करूँगी । देख लेना बहुत मार पड़ने वाली है आज तुम्हें ।"ज़ोया चिढ़ गयी थी ।

"अरे यार , खेलने में ध्यान लगा ।" एंजल धीरे से बोली । 

"शिकायत मत करना दीदी प्लीज़ ! आप को मैं पच्चीस छछून्दर प्रतिमाह दे दूँगा । प्लीज़ , प्लीज़ ,प्लीज़ ।"प्रखर ने हाथ जोड़ने का ड्रामा किया ।

"छोड़ ध्यान मत दे" , एंजल बोली । 

"और एंजल दीदी को मीडिया प्रभारी बनाऊँगा । इनको मिलेंगे ग्यारह छछून्दर प्रतिमाह ।प्रखर ने दाँत दिखाये ।

"मुझे एक छछून्दर , बाक़ी सब को दस से ऊपर , मैं नहीं करूँगा इस पहाड़ी नेवले की कम्पनी में नौकरी ।"राजीव बोला ।

"तुम तो हो ही नालायक़ , राजीव को मैं नौकरी से निकलवा दूँगा , सी॰ई॰ ओ॰ से बोल कर ।रित्विक राजीव को नौकरी से निकाल दो । इसका एक छछून्दर तुम्हारा बोनस "प्रखर ने रित्विक को फिर से निशाना बनाया।

"चटाक !!" रित्विक ने एक चाँटा लगा दिया प्रखर को । दोनो गुथम गुथा हो गए । किसी तरह से सब ने मिलकर दोनों को अलग किया । तभी प्रखर के पापा, अशोक आते दिखाई दिये ।” क्या हुआ ?" अशोक ने पूछा । 

"कुछ नहीं पापा । प्रखर कपड़े झाड़ता हुआ बोला"गिर गया था ।

"नहीं अंकल , प्रखर की कम्पनी के शेयर गिर गए ।" एंजल हँसते हुए बोली ।

"कम्पनी ? कौन सी कम्पनी ?" अशोक जी ने हैरानी से पूछा ।

"छछून्दर डॉट कॉम " एंजल बोली ।सब ज़ोर से हँस पड़े ,प्रखर को छोड़ कर ।।



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