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RENUKA TIKU

Children Stories


4.8  

RENUKA TIKU

Children Stories


भूरी और कट्टू

भूरी और कट्टू

8 mins 400 8 mins 400

                    

   

पांच छः साल की भूरी की दुनिया उसकी मिट्टी और भूसे से बनी झोपड़ी और बाहर अमरूद के पेड़ की डाल से बंधे कटु तक ही सीमित थी। भूरी अपनी मां के साथ जंगल में लकड़ियां लेने जाती थी और उसके पिता पास ही के खेतों में मक्की की खेती करते थे।

एक बार भूरी और उसकी मां जब जंगल पहुंचे, तो देखा की एक छोटा सा मेमना जोर-जोर से मैं…. मैं….. मैं करते हुए इधर से उधर और उधर से इधर कर रहा था। कुछ डरा हुआ सा और कुछ सहमा हुआ सा लग रहा था। शायद बेचारा अपनी मां से बिछड़ गया था। भूरी की मां ने बड़े प्यार से उस मेमने को गोद में उठाया, सहलाया तो मेमना भूरी की मां के गोद में सर रखकर सो गया। भूरी तो मारे खुशी के कभी मां के आगे घूमती कभी पीछे, कभी ताली पीटती तो कभी उसे प्यार से छूने की कोशिश करती। भूरी मां से बोली यह क्यों रो रहा था ?इसे भूख लगी थी क्या? मैं इसको अपनी रोटी दे दूं ? इसकी मां कहां है? क्या हम इसे अपने साथ रख सकते हैं? भूरी के प्रश्नों का कोई अंत ही ना था। मां ने भूरी से कहा की यह अपनी मां से बिछड़ गया है तभी तो इतना रो रहा है।

 भूरी फिर बोली "तो क्या हम इसे अपने घर ले जा सकते हैं?" और उसने तुरंत अपनी जेब से एक रोटी का टुकड़ा निकाला और उसे खिलाना चाहा। मेमने ने आंखें खोली और भूरी की छोटी सी उंगली मुंह में दबा ली। भूरी चिल्लाई-- "मां यह तो काटने लगा"। मां बोली- थोड़ा सब्र कर भूरी, डरा हुआ है बेचारा। पहले थोड़ा सहला ले फिर इसे हम घास खिलाएंगे।

अब भूरी लगी उसे अपने छोटे छोटे हाथों से कट्टू को सहलाने……. और बोलते जा रही थी "कितना प्यारा है, तेरी मां खो गई है? कोई बात नहीं, मेरी मां हम दोनों की है। तूने मुझे काटा क्यों? तू कट्टू है? तू कट्टू है….. और यहीं से मेमने का नाम कटु पड़ गया । भूरी ने मां से कहा- मां इसको हम कट्टू बुलाए? मां ने मेमने को भूरी को थमाते हुए कहा- संभाल अपना कट्टू भूरी, मैं जरा लकड़ियां चुन लू, नहीं तो शाम को चूल्हा नहीं जलेगा घर में। 

भूरी कटु और भूरी की मां घर लौट आते हैं और कटु तो जीता जागता खिलौना मिल गया भूरी को। भूरी ने घर आकर पूरे उत्साह से अपने पिताजी को कटु के बारे में बताया। भूरी के पिता ने भूरी को बोला- तुम्हारा दाखिला पास के स्कूल में करवा दिया है और जब तुम स्कूल जाओगी तो यह कटु कहां रहेगा? भूरी ने तुरंत बोला कट्टू भी स्कूल जाएगा मेरे साथ।

बहुत मना करने पर भी भूरी कट्टू को लेकर स्कूल गई। मां ने भूरी की दो चोटियां बनाई और उन में लाल रंग के रिबन का फूल बना दिया। रास्ते में भूरी ने अपने बालों से लाल रिबन खोला और कटु के गले में पहना दिया। जैसे ही भूरी स्कूल के दरवाजे पर पहुंची सारे बच्चे उसके आसपास घेरा डालकर खड़े हो गए। कुछ बच्चे हंस रहे थे, कुछ आश्चर्य से कभी कट्टू को देखते और कभी भूरी को। भूरी को तो अपने आसपास इतनी भीड़ देखकर लग रहा था कि जैसे वह कोई राजकुमारी है और कटु उसका राजसी घोड़ा। एक बच्चे ने मजाक करते हुए बोला- क्यों भाई, यह बकरी यहां पढेगी या तुम?

भूरी ने गर्व से सर उठा कर कहा- "यह कटु है और मैं भूरी और कट्टू मेरे साथ ही रहेगा। यह कोई मामूली मेंमना नहीं है, इसे जादू आता है और अभी तुमको पता नहीं कि यह क्या क्या कर सकता है।" सारे बच्चे अचरज से बोले- "सच में भूरी? क्या क्या कर सकता है तुम्हारा कट्टू?" भूरी ने तुरंत कहा, "समय आने पर बताऊंगी।"

अब मास्टर जी को भी भूरी ने घुमा फिरा कर कुछ कहानी सुनाई और कहा कि घर पर कोई नहीं रहता तो बेचारा कटु अकेला हो जाता है और यह तो बच्चा है ना मास्टरजी आसपास के जंगली कुत्ते इसको खा जाएंगे। इसीलिए मैं इसे साथ ले आई। कहकर भूरी रोने लगी। मास्टर जी की आज्ञा से कटु को बाहर एक पेड़ के तने से बांध दिया जाता और छुट्टी के समय भूरी और उसके सभी मित्र कटु को घेर लेते। कोई उसे लड्डू खिलाता, कोई घर से दूध लेकर आता, कोई हरे पत्ते खिलाता। कट्टू सभी बच्चों से बहुत अच्छे से हिल मिल गया। कभी किसी बच्चे के साथ खेलता कभी किसी का बस्ता गिरा देता, कभी रूठ जाता। बच्चों के नाचने पर वह भी आगे की दोनों टांगों पर उछल उछल कर अपनी खुशी जाहिर करता। कटु जी के तो बस मजे ही मजे हो गए। कई बार मास्टर जी भी चलते चलते यूं ही बोल देते और कटु पढ़ाई कैसी चल रही है? कटु को जैसे सब  समझ आता, जोर-जोर से मैं…. मैं…. मैं करता । मास्टर जी भी हंसते हुए उसे सहला कर कक्षा में चले जाते।

घर लौटते समय भूरी रोज कक्षा का सारा ज्ञान कट्टू को देते हुए चलती कभी उसे पहाड़े सुनाती, कभी हिंदी की वर्णमाला सिखाती जैसे क से कट्टू, ख से खरगोश,.... कटु हर बात पर सिर्फ मैं……... मैं…...मैं ही करता। 1 दिन भूरी ने गुस्से से बोला-- "कटु क्या हर वक्त तुम मैं…. मैं…... मैं ही करते हो?" कटु ने अपना भोला सा चेहरा ऊपर करके भूरी को देखते हुए फिर किया मैं….. मैं….. मैं। भूरी ने उसे गले लगाया और कहा- "मेरे प्यारे कट्टू, काश! तुम बोल पाते? हम कितनी सारी बातें करते, है ना कट्टू?" कटु फिर धीरे से बोला- मैं….. मैं….. मैं…... और अचानक मैं के बाद भूरी को लगा जैसे कटु ने बोला हो "हां"

भूरी रुकी और फिर बोली- "कट्टू तुमने कुछ बोला?" कटु कुछ नहीं बोला और धीरे से आगे निकल गया। भूरी पीछे पीछे दौड़ने लगी फिर बोली -"कटु तुमने हां बोला ना? कट्टू…. कटु बोलो ना ?"

भूरी और कटु घर पहुंच गए। भूरी मन ही मन सोच रही थी कि क्या वास्तव में कटु ने आज कुछ बोला? मेरा भ्रम तो नहीं? रात को यही सोचते-सोचते उसे नींद पड़ गई । अगले दिन स्कूल जाते समय भूरी ने फिर कहा- कट्टू कल तुमने क्या सच में 'हां' बोला था? मुझे तो क्यों ऐसा लगा कि तुमने बोला? और भूरी बोलते बोलते आगे निकल गई। पीछे से आवाज आई-- "हां" भूरी ने चौक कर पीछे मुड़कर देखा, कटु रुका हुआ था और एकट्रक भूरी को देख रहा था। भूरी दौड़ कर आई और कटु को गले लगा कर बोली- मुझे पता था, मेरा कटु सबसे अलग है, कोई मामूली मेंमना नहीं, बिल्कुल अद्भुत! मेरा कटु बोल सकता है, समझ सकता है और खुशी से नाचने लगी। मेरा कट्टू बोला, मेरा कटु तोता ,मेरा कटु बोला ,मेरा कटु तोता। भूरी खुशी से नाचती जा रही थी, अचानक कटु ने बोला- भूरी यह राज तुम्हारे और मेरे बीच में ही रहना चाहिए। भूरी  तो खुशी से फूले नहीं समा रही थी। फट से बोली हां हां कट्टू, पता है, पता है ।

 यूं ही कई महीने बीत गए। घर से स्कूल और स्कूल से घर आते समय भूरी और कटु खूब बातें करते हुए चलते। भूरी को तो बोलने वाला मेमना मिल गया। यही नहीं भूरी कटु को जितना सिखाती कटु तुरंत सीख जाता।

एक दिन भूरी को स्कूल से घर लौटते समय किसी बच्चे ने कटु से बात करते हुए सुन लिया पहले तो उसे विश्वास ही ना हुआ फिर उसने अगले दिन कुछ और मित्रों के साथ छिपकर भूरी और कटु का पीछा किया। बच्चों के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा- "अरे! भूरी ठीक कहती थी कि यह मामूली मेमना नहीं है, यह तो बोल सकता है।"

अब इस बच्चे की नियत बिगड़ गई, और उसने निश्चय किया के कट्टू को किसी भी तरह हासिल कर लूंगा। एक  दिन छुट्टी होने से कुछ समय पहले वह बच्चा बाहर मैदान में गया और कटु का लाल रिबन खोल दिया। कटु को लगा कि शायद वह बच्चा उसे खेलना चाह रहा है और उसके साथ-साथ पीछे-पीछे भागने लगा। स्कूल के बाहर जाने पर कटु को लगा कि कुछ तो गड़बड़ है, वह जोर-जोर से मैं….. मैं…... मैं…. मैं करने लगा। बच्चा बोला- "कटु मुझे पता है- कि तुम बोल सकते हो, मैं तुम्हें अच्छे दाम में बेचूंगा, नहीं, नहीं ,मेले में तुम्हारा शो रखूंगा और टिकट लगाकर खूब पैसे बनाऊंगा।" कट्टू सिर्फ मैं….. मैं…... मैं चिल्ला रहा था।

छुट्टी होने पर भूरी ने देखा कि कटु वहां नहीं है ,तो उसका रो रो कर बुरा हाल हो गया । कट्टू, मेरा प्यारा कट्टू…... कट्टू, कहां हो कट्टू? सभी बच्चे कटु को ढूंढने निकल पड़े।

कटु कहां मिलता? वह तो बहुत दूर निकल चुका था ।

 रोते-रोते भूरी घर पहुंची और मां से लिपटकर खूब रोई। मां ने बहुत समझाया- आ जाएगा कट्टू, मत रो भूरी। अब वो रास्ता पहचानता है, निकल गया होगा कहीं घास खाने। अब भूरी ने मां को बताया- मां कटु को किसी ने चुरा लिया, मेरा कटु बोल सकता है, सच मां। हम खूब बातें करते हुए आते थे रोज। मैं सच कह रही हूं, मैं मेरा विश्वास करो ।

मां को तो यकीन ही नहीं हो रहा था, सोचा शायद सदमे में भूरी यह सब बोल रही है। फिर भी भूरी  का मन रखने के लिए बोली- हां हां हो सकता है तभी हो सकता है ,किसी ने देखा हो ,और चुरा लिया हो। पर वह लौट आएगा भूरी, देख लेना।

भूरी का रोना ही ना थम रहा था, तीन दिन से स्कूल भी नहीं गई। कटु, कट्टू मेरा प्यारा कट्टू वापस आ जाओ …. .बस यही रट लगी हुई थी।

अचानक पांचवें दिन रात को भूरी को लगा कि कोई उसे बुला रहा है-- भूरी…. भूरी, भूरी ने दौड़कर दरवाजा खोला तो देखा कि कटु बाहर खड़ा था। भूरी को अपनी आंखों पर विश्वास ही ना हुआ, वह सपना तो नहीं देख रही थी? जोर से चिल्लाई- कट्टू…..

भूरी ने दौड़ कर कट्टू को गले लगाया और बोली- कहां चला गया था कट्टू? कटु बोला-

देखा - मेरा बोलना कितना भारी पड़ा भूरी? ना मैं बोलता, और ना ही तुमसे दूर जाता। अंदर से मां दौड़ कर बाहर आई और बोली '-किससे बात कर रही हो इतनी रात में भूरी?' 

भूरी बोली- देखो मां, कट्टू आ गया….. कट्टू मैं….. मैं….. मैं. करता हुआ भूरी की मां की गोद में चला गया। इसके बाद कट्टू फिर कभी नहीं बोला। 

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