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Amita Kuchya

Others

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Amita Kuchya

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बारातियों को करना पड़ा इंतजार

बारातियों को करना पड़ा इंतजार

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मुझको वो दिन याद आ रहे थे। कितना बड़ा दिन था ।जिसमें पूरे परिवार वाले खुश नजर आ रहे थे। कितनी तैयारियां , कितनी खरीददारी के बाद वो दिन निकट आ गया। आखिरकार हर मां-बाप की चिंता यही रहती है। उसकी बेटी ससुराल में जाकर बहुत खुश रहे।


धीरे-धीरे नैना की शादी की तारीख के दो दिन बचे थे। शादी बाहर जाकर होना थी। सभी सामान याद से रखते जा रहे थे। नैना की बड़ी दीदी होने के कारण मैं एक -एक चीज की लिस्ट बनाकर रख रही थी।


मेरी और नैना की खूब बनती थी। कभी मां आवाज लगाती , कभी पापा आवाज लगाते,इस तरह पूरा दिन निकल रहा था।


रात को मेंहदी की रस्म होने वाली थी। मैंने नैना को कहा - " जल्दी से मेंहदी  लिखवाना चालू कर लेंगे। क्योंकि शादी वाली मेंहदी में काफी समय लगता है। " इस तरह मेंहदी का फोटो शूट भी करवाना था , सभी रिश्तेदार भी आने लगे। अब फटाफट रस्म भी चालू हो गई। सभी ने मेंहदी के गाने पर डांस भी किया ।थीम भी ग्रीन रखी गई। 

इस तरह नैना की मेंहदी लग गई। सुबह हम लोग भोपाल के लिए निकले। अब हम लोगों ने वहां पहुंच कर हल्दी रस्म की ।अब मड़वा गड़ना था मां ने फुफा जी को बुलाया, यहां सभी व्यवस्थाएं लड़के वालों को करनी थी


सभी व्यवस्थाएं खूब अच्छे से यहां की गई थी। अब समय नैना के तैयार होने का आया करीब ५ बज चुके थे। नैना को पार्लर तैयार होने जाना था। जो ज्वैलरी और लहंगा पार्लर जाने के लिए रखने लगे, तभी पता चला कि ज्वैलरी नहीं मिल रही है । ज्वैलरी के बिना नैना कैसे तैयार होगी। अब मां से पूछा "-मम्मी ज्वैलरी बाक्स कहां है। तब मम्मी ने कहा कि मेरे पास नहीं है।हमें लगा कि नैना ने रख लिया है। "


मैंने तो ज्वैलरी को देखकर तुम लोग को वापस दे दी थी। अब क्या करें। नैना का बुरा हाल था। मैचिंग वाली ज्वैलरी थी,सब सामान, सब बैग भी चैक कर चुके थे।


मैंने कहा - " अब लंहगा के मैचिंग से ज्वैलरी मिलना मुश्किल है। अब जैसे तैसे हम लोग निश्चित किया कि गोल्ड वाली ही ज्वैलरी पहना दी जाये,पर मम्मी ने कहा कि "हैवी वर्क वाले लंहगा के साथ में ज्वैलरी नहीं जमेगी। फिर उन्होंने सलाह दी कि पार्लर में जैसा ज्वैलरी सेट मिले,  पहले अपने वाले लंहगा से मैच करना ,अगर मैचिंग न हो तब दूसरी लंहगा चुन्नी और सेट बुक करके तैयार करवाना ।"इस तरह डबल चार्ज देकर नैना को तैयार करवाया।


अब जीजा जी की शेरवानी से मैचिंग करना लहंगा और ज्वैलरी बहुत समय लग रहा था,

अब दुल्हन के हिसाब से मेकअप और तैयार होने में देर हो गई। बार -बार पापा का फोन आ रहा था


बारात का समय हो गया है।

तुम लोग पार्लर से जल्दी निकलो। दूल्हा के पापा ने पूछा नैना बहू कहां है,उसे बुलाया जाए,तब नैना के पापा ने समधी जी को बोला बुला रहे हैं , और वो बारातियों और समधी को संभालते रहे।


जैसे तैसे हम जन -मासे में पहुंचे ,तब बारात द्वार तक पहुंच चुकी थी। नैना दूसरे दरवाजे से अंदर आई और नैना को घरवालों ने बारात में दुल्हे पर चावल छिटकना रस्म करवाई। इस रस्म को पहले दुल्हन ही करती है तभी आगे की रस्म होती हैं।और दूल्हे को घोड़ी और बग्घी से उतारा जाता है।इस नाचते हुए बारात अंदर आई और गर्मजोशी से उनका स्वागत सत्कार किया गया।दूल्हे की द्वारचार की रस्म भी संपन्न हुई।


इस तरह शादी में फिर आगे कोई परेशानी नहीं हुई।

ऐसी ही शादी की सब रस्में अच्छे से हो गई। । लड़के वाले बहुत व्यवहारिक थे ,इस कारण  नैना आज बहुत सुखी है।


दोस्तों- शादी ब्याह में कहीं कुछ न हो,ऐसा हो ही नहीं सकता है। कभी कभी कुछ कमी, कभी कोई गलती हो ही जाती है। कभी-कभी कुछ खास यादगार बन जाता है। शादी में बारात का दुल्हन के लिए इंतजार करना बहुत बड़ी बात होती हैं। यदि लड़के वाले व्यावहारी हो तो कोई समस्या नही होती है।



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