बाल मनोविज्ञान
बाल मनोविज्ञान
"क्या हुआ शांताबाई?" "मैडम पति को दीये , रंगोली की दुकान लगवाई। दुकानों के आगे बैठकर वह अपना धंधा चलाता था। भारी बारिश ने चौपट कर दिया। दिवाली पर सब ने दुकानों को लाइटों से सजाए हैं। दुकान के सामने जगह देने को तैयार हैं पर भारी बारिश में कैसे बैठें? हम ग़रीबों को कहीं चैन नहीं।"
संजू, रिया और कामवाली की बात सुन रहा था। पेरेंट टीचर मीटिंग में रिया पहुंची तो टीचर उसकी ड्राइंग की तारीफ कर रहीं थी उसने सतरंगी छतरियां आसमान में लगा दी थीं ताकि ग़रीब लोग भी बारिश से बच जाएं। बालमन पर हमारी बातचीत का असर होता है। बच्चे कच्चे मिट्टी से होते हैं जैसे ढालो वैसे ढल जाते हैं।
जिज्ञासु प्रवृत्ति के होते हैं उनके सवालों का जवाब हमें सोच समझकर ही देना चाहिए हम बच्चों को जैसा बनाना चाहते हैं वैसा व्यवहार हमें खुद भी करना चाहिए।
