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Sunita Mishra

Children Stories

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Sunita Mishra

Children Stories

बाल मन

बाल मन

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202

बबलू स्कूल बस में नहीं था, कहाँ रह गया। स्कूल गेट पर ताला लगा है। उसकी टीचर ने कहा वह आया ही नहीं। हे भगवान मेरे बच्चे की रक्षा करना। खिन किसी ने----नहीं नहीं, उसे कोई क्यूं----हम कोई सेठ साहूकार नहीं। "नहीं जी हमारा किसी से कोई झगड़ा भी नहीं " तीन बजे स्कूल बंद होता है पांच बज रहे है। ये और दीदी पुलिस स्टेशन गये है कही से कोई खबर नहीं " अब तो अंधेरा भी घिरने लगा। हाय मेरा बच्चा, कितना डरता है अंधेरे से। भूखा प्यासा कहाँ होगा।

पड़ोस की रमा कह रही थी बच्चे चोरी करने वाले उनके हाथ पैर तोड़ देते है, भीख मंगवाते है। कीर्ति को लगा वह बेहोश हो रही है। पति लौटे, बबलू को लेकर, साथ में एक व्यक्ति और था। कीर्ति ने बच्चे को छाती से चिपका लिया। कहाँ चला गया था मेरा लाल ।" "ये पार्क में बैठा रो रहा था, पूछने पर कहने लगा मैं घर नहीं जाऊंगा। मेरे घर जाने से मम्मा मर जाएंगी।" उस व्यक्ति ने बताया। कीर्ति को याद आया, रोज ही स्कूल जाने के वक्त ये परेशान करता है आज भी लंच बॉक्स फेंक दिया, बस्ते से कॉपी किताब पलट दी, जमीन पर लोट गया। तब उसने गुस्से में कहा था- "तुम ऐसे तंग करोगे तो मैं" -- "तो क्या करोगी"----उसका पल्ला खीचते हुए बोला-------बोलो क्या, क्या करोगी" "मैं मर जाऊंगी।"



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