अपना अपना चाँद
अपना अपना चाँद
रात की रंगबिरंगी रोशनी में एक रुफ़ टॉप रेस्टोरेंट में कोने की टेबल में एक प्रेमी जोड़ा डिनर के लिए बैठा हुआ था।लोगों की भीड़ थी और वहाँ मद्धम आवाज़ में पाकीज़ा फ़िल्म का गाना बज रहा था,'चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो... 'दोनों बड़े ही प्यार और सुकून से एकदूसरे से बात कर रहे थे।गाने के बीच लड़के ने लड़की से कहा, "मैं तुम्हे चाँद के पार ले जाना चाहता हूँ।चलोगी न मेरे साथ चाँद के उस पार?"निगाहों निगाहों में लड़की ने हामी भर दी।
उधर बहुत दूर चांदनी रात में एक आलीशान घर की बालकनी में हैवी डिनर के बाद बेटा पापा से बातचीत कर रहा था।बेटा कह रहा था,"पापा, मेरा सपना है कि मैं NASA में काम करु और दूर आसमाँ में चाँद पर चला जाऊँ।" पापा गर्वित होकर बेटे की ओर देखकर मंद मंद मुस्काने लगे।
पास की ही बस्ती में एक छोटा बच्चा अपनी टूटी फूटी झोपड़ी वाले घर की खिड़की से बाहर देखते हुए माँ से कह रहा था,"माँ,मुझे कब मिलेगी उस चमकते चाँद जैसी गोल रोटी?बहुत भूख लगी है।"
माँ बेटे की निरीह आँखों से नज़रे चुराते हुए यहाँ वहाँ बर्तनों में हाथ डाल कर देखे जा रही थी लेकिन उसके हाथ कुछ नही आया।
और बहुत दूर आसमाँ में चाँदनी रात में चाँद हर किसी से बेखबर अपनी ही मस्ती में चले जा रहा था.....
