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Anuradha Negi

Children Stories

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Anuradha Negi

Children Stories

अनाथ बिल्ली

अनाथ बिल्ली

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सर्दियों के दिन थे हम सब लोग खाना खाकर सोने की तैयारी में थे। और मेरी मां बाहर गाय को चारा दे रही थी। जब मैं चारा देखकर अंदर आई तो उन्होंने बिल्ली की आवाज सुनी जो किसी बच्चे की थी। मां ने पीछे देखा और एक छोटी सी बिल्ली आंगन के पास रास्ते में बैठी थी और रोती हुई आवाज में बोल रही थी। मां अंदर आई और मुझे बताया की बिल्ली का बच्चा ठंड से रो रहा है। मैं एकदम अपने बिस्तर से उठी और आंगन में उसे देखने गई तो वह एक छोटी बिल्ली थी शायद बच्ची जो शायद अपनी मां से बिछड़ गई थी। आप बहुत कमजोर और डरी हुई सी थी। मैंने रोटी के टुकड़े देकर उसे पास बुलाना चाहा लेकिन और डर के मारे आई नहीं। फिर मैं धीमे कदमों से उसके पास गई और झट से उसको पकड़ लिया। उसे अपने पास अंदर लाइ उसके सर पर हाथ फेरा उससे बात करने की कोशिश की फिर उसे रोटी खिलाई और वह एक रोटी लगभग पूरी खा चुकी थी। उस रात मैंने उसे अपने पास सुलाया और ऐसी अपने मन से पिंकी नाम रखा। अगली सुबह मैंने उसे अपने हिस्से का जो मां ने दूध का गिलास दिया था उसमें से आधा दूध दिया। और कुछ दिन तक इसी को जारी रखा। जब पिंकी में थोड़ी जान आती दिखाई दी तो मैंने उसके लिए एक अलग छोटा घर बनाया उसके लिए बिछोना लगाया एक छोटा बर्तन रखा और उसका ख्याल रखने लगी। धीरे-धीरे पिंकी बढ़ी हुई पर वह बाकी बिल्लियों का सामना नहीं कर पाती थी। और रोज अपने आप को चोट पहुंचा कर लाती थी मैंने बहुत बार कोशिश की उसे दूर गांव भेजने की जहां से वह आई थी। लेकिन पिंकी बिल्कुल भी कहीं रहती नहीं थी।और दूसरे तीसरे दिन वापस आ जाती थी अब पिंकी हमारे पास ही रहती है यही खेलती है और छत में धूप सेंकती है।


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