अनाम

अनाम

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उस भीषण सड़क दुर्घटना की यादें आते ही संजना सिहर उठती। वह दिन संजना के लिए कभी न भूलने वाली दुखांत घटना बन गई थी। हर रोज की तरह वह उस दिन भी ऑफ़िस जाने के लिये निकली थी। निजी ऑफिस में क्लर्क का कार्य कर रही संजना ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बस पकड़ी। हाइवे पर आते ही बस हवा से बातें करने लगी। तभी एक जोर का झटका लगा और बस हाइवे किनारे खड़े एक अन्य भारी वाहन से जा टकराई। भीड़ंत इतनी ज़ोरदार थी की बस के केबिन में बैठै यात्री कांच तोड़कर बाहर गिर पड़े। कुछ यात्री गंभीर रूप से घायल हुये थे। संजना भी उन्हीं में से एक थी। एक माह के निरंतर उपचार के बाद वह स्वस्थ हो सकी। संजना ने नोट किया कि हॉस्पिटल सभी उससे मिलने, आये सिवाए धीरज के। धीरज और संजना की सगाई छः माह पूर्व ही हुई थी। अगले साल दोनों का विवाह होना तय हुआ था। दुर्भाग्य से सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल संजना के प्राण बचाने के लिए डाक्टर्स को उसका यूट्रस निकालना पड़ा। जिससे संजना की जान तो बच गई थी किन्तु अब वह कभी माँ नहीं बन सकती थी। धीरज को जब इस बात का पता चला तब उसने संजना से अपना सभी तरह का संबंध तोड़ लिया। संजना के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। उसे विश्वास था कि उसका माँ न बन सकने का दुःख भुलाने में धीरज उसका सहयोगी होगा। क्योंकि जितना प्रेम संजना धीरज से करती थी उससे कहीं अधिक प्रेम धीरज संजना से करता था। किन्तु धीरज द्वारा संजना से किनारा कर लेने की घटना ने उसे अंदर तक तोड़ दिया। किसी तरह उसने स्वयं को संभाला। वह पहले की तरह ऑफ़िस जाने लगी थी। कुछ ही समय में वह उस एक्सीडेंट को भूल गई। किन्तु धीरज को वह भूल न सकी। दुर्घटना के बाद धीरज ने संजना की कोई खैर-खबर नहीं ली। संजना अवश्य धीरज के संबंध जानकारी जुटा लिया करती। धीरज की जिन्दगी में अब कैटरीना थी। दोनों बहुत खुश थे। जल्दी ही दोनों शादी करने वाले थे। कैटरीना बहुत प्रैक्टिकल थी। उसे धीरज द्वारा संजना को छोड़ने के विषय में पता था। यह बात कैटरीना ने स्वंय धीरज के मुंह से उगलवाई थी।

"यह तुम क्या कह रही हो कैट? मुझे पोटंसी टेस्ट करवाना होगा?" धीरज नाराज़ था।

"हां! इसमें इतना नाराज़ होने की क्या जरूरत है धीरज। तुम अकेले टेस्ट थोड़े ही कराओगे? मैं भी अपने सभी जरूरी टेस्ट कराऊंगी।" कैटरीना बोली।

"मगर इसकी क्या जरूरत है कैट?" धीरज झल्लाकर बोला।

"जरूरत है धीरज। शादी से पहले मेन्टली और फिजिकली स्ट्रोंग होना बहुत जरूरी है। अगर कुछ कमी हो या बीमारी हो तो उसे ट्रीटमेंट से ठीक किया जा सकता है।" कैटरीना बोली।

धीरज यह जानता था कि कैटरीना ने जो एक बार निश्चय कर लिया वह उसे पूर्ण करके ही दम लेती थी। उसने अपने सभी मेडीकल टेस्ट कराने की सहमती दे दी। दोनों ने एक साथ हॉस्पीटल में जाकर टेस्ट दिये। अगले दिन मेडीकल रिपोर्ट आने वाली थी। धीरज कामकाज में व्यस्त होने के कारण हॉस्पीटल न जा सका। कैटरीना ने उन दोनों की रिपोर्ट डाॅक्टर को दिखाई। रिपोर्ट में अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातें सम्मिलित थी। कैटरीना पुर्णता स्वस्थ्य थी और वह धीरज का वंश बढ़ाने के सर्वथा योग्य थी। किन्तु धीरज के स्पर्म में बलिष्ठ शुक्राणुमों की कमी थी। इनकी अनुपस्थिति में वह पिता नहीं सकता था। धीरज को एक लम्बा मेडीकल इलाज कराने की सलाह दी गई। डाॅक्टर ने जो परहेज बताये वह भी धीरज की आनंदमय जीवन को रसहीन बनाने के लिए पर्याप्त थे। इन सब के बाद भी धीरज पिता बन सकेगा इस बात की कोई गारंटी नहीं थी।

"धीरज! यह सत्य है कि विवाह के बाद परिवार बढ़ाने की आवश्यकता होती है। तुम्हारे पौरूष में कमी के कारण यह एक कठिन कार्य है। शादी के बाद हम दोनों में इस विषय को लेकर मनमुटाव होना स्वाभाविक है।" कैटरीना बोल रही थी।

धीरज कैटरीना की बातें कुछ-कुछ समझ रहा था।

"इससे बेहतर है कि तुम पहले मेडीकली अच्छी तरह से ठीक हो जाओ! हम तब ही शादी करे तो यह हम सभी के लिए अच्छा होगा।" कैटरीना ने स्पष्ट किया।

कैटरीना की स्पष्ट वादिता से धीरज परिचित था। वह यह भी जानता था कि यदि वह विवाह के लिए कैटरीना पर ज़ोर दे तब कैटरीना शादी करने के लिए तैयार भी जायेगी किन्तु दोनों के वैवाहिक जीवन में शायद फिर वह मधुरता नहीं रहेगी। उसे संजना की याद आ गई। जैसे उसने संजना को उसके माँ न बन सकने के कारण छोड़ दिया था, ठीक उसी तरह कैटरीना धीरज को पिता न सकने के कारण छोड़ रही थी। धीरज ने कैटरीना को अपने सभी रिश्तों से स्वतंत्र कर दिया। उसके मन में दुःख के स्थान पर पश्चाताप के भाव उभर आये। वह संजना के पास लौटना चाहता था किन्तु उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी। समुद्र किनारे लहरों को आते-जाते हुए धीरज देख रहा था। आज बहुत दिनों के बाद वह यहां आया था। संजना के साथ वह अक्सर यहां आया करता था। इतने में संजना उसे सामने से आते हुई दिखाई दी। धीरज संजना को अपने निकट आते देख चौंककर खड़ा हो गया।

"संजना तुम!" धीरज ने कहा।

"हां धीरज मैं!" संजना धीरज के सम्मुख आकर बोली।

"तुम्हें क्या लगा! मैं तुम्हें यूं ही आसानी से भूल जाऊंगी।" संजना बोली। संजना को धीरज के ब्रेकअप के विषय में सबकुछ पता चल गया था। वह यह भी जान चुकी थी कि धीरज अब कभी पिता नहीं बन सकेगा।

"मुझे माफ़ कर दो संजना! मैंने तुम्हारे साथ जो किया वही मेरे साथ हुआ है।" धीरज भावुक हो गया।

संजना ने धीरज को गले लगा लिया। दोनों की आँखें नम थी।

"मैं नहीं जानती धीरज, मेरा प्रेम सच है या झूठ! मगर इतना अवश्य जानती हूं कि तुम्हारे सिवा मेरे हृदय में न पहले कोई था और अब कोई है। परिस्थिति चाहे कुछ भी हो, तुम ही मेरा पहला प्यार थे और आगे भी रहोगे। हम मिलकर फिर से नई शुरुआत करेंगे।"

संजना ने कहा।

"मगर संजना! संतान के बिना वैवाहिक जीवन का क्या औचित्य?" धीरज ने चिन्ता जताते हुए कहा।

"अपनी संतान को तो सभी पाल-पोसकर बढ़ा करते धीरज! मगर किसी दूसरे की संतान को अपनाने का साहस कुछ विरले लोग ही दिखा पाते है।" संजना ने हल सुझाया।

"तुम्हारा मतलब?" धीरज बोलते-बोलते रूक गया।

"हां धीरज! हम अनाथ आश्रम से बच्चा गोद लेंगे। और उसे अपने जन्म लिए बच्चे की ही तरह पाल पोसकर बड़ा करेंगे।" संजना ने स्पष्ट किया।

धीरज समझ गया। उसने संजना को हृदय से लगा लिया। आज उसे पता चल गया कि संजना से अधिक प्रेम उससे कोई और नहीं कर सकता। दोनों ने शादी कर ली। जल्द ही वे बेबी निहारिका को अनाथाश्रम से घर लाये। अब उनका परिवार पूर्ण हो चुका था।



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