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Vinay Panda

Others

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Vinay Panda

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ज़िन्दगी अस्त-व्यस्त है !

ज़िन्दगी अस्त-व्यस्त है !

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जब से तुम पास नहीं हो मेरे

चैन एक पल का नहीं दिल में

सब अस्त-व्यस्त सी हो गयी ज़िन्दगी

घर के सामान देखो बिखरे पड़े हैं।


कहते भी लोग हैं

बिनु गृहणी के घर सून होता है

टपकता है मन आँखों से रिसकर

दिल हमेशा ही जब ग़मगीन होता है।


आ लौटकर अब आ जा

यह बेजान सा घर तुझको पुकारे

हम जी सकते नहीं बग़ैर अब तेरे

माफ़ कर दो हमें, हम तुमसे जो हारे।


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