Kavita Sharrma
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सहज चलन पर चलते रहना
कितना सहज होता है
युगांतर उपस्थित करना पर
उतना ही कठिन होता है
हर नज़र का सामना कर
उदाहरण बनना पड़ता है।
अपनी इक नयी पहचान
को प्रस्तुत करना पड़ता है।
जिंदादिली
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