STORYMIRROR

GOPAL RAM DANSENA

Others

3  

GOPAL RAM DANSENA

Others

ये सब उधार की

ये सब उधार की

2 mins
11.5K

सूरज की पहली किरण के साथ

जाग जाते हैं समस्याएं

जाग जातें है आस

की आज कहीं 

सुकून मिल जाये


मैं जी तोड़ करता हूँ प्रयास

क्योंकि मेरे साथ 

वसीयत में कुछ नहीं आया

इन दो पिंडों के अलावा


कर्म और कारण से बंधा 

सपने की धागे मैं भी हूँ बुनता

जीवन के इस छोर से उस छोर तक

थामे इस डोर को 


बस चलता हूँ

आखरी साँस तक

क्योंकि अपनी जिंदगी

तो उधार की है।


जीवन के रंग मंच में

सजे हुए हैं आस्था के दीप

हीरे मोती अमूल्य निधि 

भेंट कर जाते लोग

पूजा की थाली में


अकूत धन से

सजा जाते है लंगर

मैं हाथ जोड़ लेता हूँ

एक फूल लेकर 


उस सर्वेश्वर की महिमा देखकर

सच मैं हूँ मांगने योग्य

मिले न मिले साकार

लंगर से तृप्त हो झुक जाते सर

क्योंकि मेरी बन्दगी तो उधार की है।


लोग सपनों को सजा लेते हैं

अपने जीवन में

अपने उदर और घर में

कई सितारे लगा कर

हम दूर से दर्शन करके


खा लेते हैं पकोड़े बाँट कर

सड़क के किनारे अपनों से लेकर

अपने को भाग्यशाली समझ

की लालसा पूरा हुआ 

जीवन की

क्योंकि अपनी मौजूदगी तो उधार की है।


Rate this content
Log in