STORYMIRROR

कल्पना रामानी

Others

3  

कल्पना रामानी

Others

खुदा से ख़ुशी की -ग़ज़ल

खुदा से ख़ुशी की -ग़ज़ल

1 min
298

खुदा से खुशी की लहर माँगती हूँ। 

कि बेखौफ हर एक घर माँगती हूँ।


अँधेरों ने ही जिनसे नज़रें मिलाईं

उजालों की उन पर नज़र माँगती हूँ।


जो लाएँ नए रंग जीवन में सबके

वे दिन, रात, पल, हर पहर माँगती हूँ।


जो पिंजड़ों में सैय्याद, के कैद हैं, उन

परिंदों के आज़ाद, पर माँगती हूँ।


है परलोक क्या ये, नहीं जानती मैं

इसी लोक की सुख-सहर माँगती हूँ।


करे कातिलों के, क़तल काफिले जो

वो कानून होकर, निडर माँगती हूँ।


दिलों को मिलाकर, मिले जन से जाके 

हर एक गाँव में, वो शहर माँगती हूँ।  


बहे रस की धारा, मेरी हर गज़ल से

कुछ ऐसी कलम से, बहर माँगती हूँ।

के

करूँ जन की सेवा, जिऊँ जग की खातिर

हे रब! ‘कल्पना’ वो हुनर माँगती हूँ।   


Rate this content
Log in