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वक्त का ज्ञान

वक्त का ज्ञान

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माँ मम्मी माता
"बच्चो की
भाग्य विधाता ,
गुरू शिक्षक
बच्चों को
ज्ञान पढ़ाता
जज न्यायाधीश
सबका कैसा
फैसला करता
कवि रचनाकार
अपनी कल्पना
से हर बिषय पर
कविता लिखता
शब्दों की मर्यादा
से गागर मे भी
सागर भरता,
वक्त के साथ
हमेशा ही उसी
विषय पर लिखता
शिक्षक गुरू तो
बस वही पढ़ाते 
जो सरकारी
सिलेबस मिलता है
फिर कैसा शिक्षक है
जो ज्ञानी कहलाता है
जज और न्यायाधीश
कहते है सबसे
बड़ा होता है
गवाह दस्तावेज पुलिस
की जाँच मे जो होता है
और वकीलों की जिरह
सुनने पर ही केस मे
कानून की धाराओं पर
अपना फैसला देता है
अपनी मर्जी से वह
कुछ नही कर सकता है
फिर भी न्यायाधीश
कहलाता है।
एक और वह है
जो वैज्ञानिक
कहलाता है
पढ़े ध्यान से अपनी
बुध्दि ज्ञान से नई
नई खोज करता है
जिस वक्त मे जिसकी
हुई जरूरत वही नई
खोज करता है ।
यही ज्ञान दाता है
कवि और वैज्ञानिक
दो ही ज्ञान के
सच्चे ज्ञाता है
क्षमा करे मुझको
ये मेरा आकलन है
आप भी चाहे करे
वही मूल्याकन है
छोटी सी बुध्दि से
मैंने जो लिखा है
माफ करे मुझको
भाई वक्त देखकर
ये सब जो ऐसा
मैने ज्ञान देखा है
जाना है समझा है
वही तो लिखा है ।


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