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Mayank Kumar

Others

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Mayank Kumar

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उस आंधी में तुम को देखा

उस आंधी में तुम को देखा

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उस आंधी में आज तुमको देखा

जब हवाएँ झुमा रही थी

सारे वृक्षों को, घरों के खिड़कियों को,

शायद ऐसा ही होता था

जब तुम आती थी मेरे घर..!


उस घर, जिसमें उमंग होती थी

कुछ तो बात होती थी वहां पर

जहां पर मस्ती का त्योहार होता था

उस त्योहार में सारा आसमाँ होता था..!


उस आसमाँ में पंछियों सी उड़ान होती थी

जहां पर न कोई थकान होती थी

लेकिन, जैसे ही आज की आंधी थमी

वैसे ही आसपास की फिजाएं शांत हो गई


ख़ैर, वैसे भी आंधी तभी चलती है

जब बेकली ख़ूब शोर करती है..!

उस आंधी में आज तुम को देखा !


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