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Supriya Devkar

Others

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Supriya Devkar

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तय ना कर सके हम

तय ना कर सके हम

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तय ना कर सके हम  कौन अपने कौन पराये 

जीवन की इस जंग में कौन कहाँ कैसे हराये


हर मोड़ पर सोचते थे अपने थाम लेंगे हाथ 

बेझिझक देंगे हमें  हर मुश्किल में साथ 


पर अपनों ने कभी भी  नहीं सोचा हमें अपना 

छोड़ दिया अकेला राह पर लगे जैसे कोई सपना 


गुजरे हुए पल याद करके आता है अब रोना 

छोड़ा जरूर आंचल मगर जँचता नहीं अपनों को खोना



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