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Sayli Kamble

Others

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Sayli Kamble

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ठहराव

ठहराव

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हर कोई बस भाग रहा है

पैसे कमाने की दौड़ में 


जो चाहे वो दिलाएगा पैसा

पड़ा है इस गलत सोच में 


माना की पैसा है जरूरी

जरूरतें पूरी करने में 


पर जरूरतें इतनी बढ़ा दी हमने

की फंस गए है हम लालच में 


खुशी को जोड़ दिया पैसों से

की मतलब आ गया रिश्तों में 


सबकी राहे ही अलग है 

अव्वल कोई ना आए दौड़ में 


धन से मिलता है आराम, सामान 

खुशी, सम्मान तो हमारी सोच में 


कहीं खो ना दे सबकुछ धन के पीछे

सही ठहराव है जरूरी जीवन में


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