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Chetan Gondalia

Others

3.7  

Chetan Gondalia

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तमां न कीजिये

तमां न कीजिये

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नुक्ते-हलक-फ़रोशो से शिकवा न कीजिये दोस्तों !

खुद से भी इन्हें ढेरों-ढेरों शिकायत है।

इक-इक जुमला जैसे इक वार है,

क़ायनात भी इनसे बहुत शर्मशार है।


न फूटे किसी शै की शान में दो बोल भी,

तल्ख़ ज़ुबाँ पे छाई लफ़्ज़ों की ग़ुरबत है।

तमां न कीजिये इनपे

जादहे-मंज़िल पे हो नज़र अपनी,

ऐसे कांटे-कंकर ज़मीं पे बहुतायत है...!!



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