STORYMIRROR

Deepa Joshi Dhawan

Others

3  

Deepa Joshi Dhawan

Others

स्वर्णिम भारत

स्वर्णिम भारत

1 min
369

मुझे प्रतीक्षा है कबसे उस दिन की जब

नमस्ते भी हो और वालेकुम सलाम भी

फ़ख्र से सीना चौड़ा कर कहें हम सभी

हिंदुस्तानी ही तो थे अब्दुल कलाम भी।


मातृभूमि भारत का वंदन गीत है मात्र

वंदेमातरम नहीं है हिन्दू या मुसलमान

नमन है उस प्राचीन संस्कृति को जहां

आरती के समकक्ष ही होती है अजान।


संसार में अपने अस्तित्व की चाह यदि

भारतवर्ष से हमें भेदभाव हटाना होगा

प्रत्येक गुरु बने रामकृष्ण परमहंस सा

हरेक छात्र को विवेकानंद बनाना होगा।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन