सुकून
सुकून
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तेरे पास जो सुकून है
वो जग में कहीं नहीं
मगर भाग्य में लिखा है
जो मिलता है बस वही
नजदीकियों से कुछ रंज
है शायद परवरदिगार को
तभी वो दूर रखता मुझसे
मेरे जान ए जहान को
शायद मेरे प्रारब्ध में ईश्वर
कुछ परिवर्तन करे मंजूर
इस उम्मीद की डोर थामे
आराधना कर रहा भरपूर।
