सुई धागा
सुई धागा
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सुई धागे सी है जिंदगी अपनी
हर पल बुनती रहती है
कभी रिश्तों को,
कभी सपनों को,
कभी सुख को,
तो कभी अरमानों को।
सुई धागे सी है जिंदगी अपनी
कभी तुरपाई कर देती है
किसी मुस्कुराहट की,
किसी के प्यार की,
किसी के बचपन की,
किसी के लड़कपन की।
सुई धागे सी है जिंदगी अपनी
जो रफू कर देती है
किसी के दुख को,
किसी के क्रोध को,
किसी के कष्ट को,
किसी के रोष को।
