सुई धागा
सुई धागा
1 min
530
सुई धागे सी है जिंदगी अपनी
हर पल बुनती रहती है
कभी रिश्तों को,
कभी सपनों को,
कभी सुख को,
तो कभी अरमानों को।
सुई धागे सी है जिंदगी अपनी
कभी तुरपाई कर देती है
किसी मुस्कुराहट की,
किसी के प्यार की,
किसी के बचपन की,
किसी के लड़कपन की।
सुई धागे सी है जिंदगी अपनी
जो रफू कर देती है
किसी के दुख को,
किसी के क्रोध को,
किसी के कष्ट को,
किसी के रोष को।
