STORYMIRROR

Harsh Kanojiya

Others

3  

Harsh Kanojiya

Others

सत्यता।

सत्यता।

1 min
255

झोले वाले भी अमीर देखें

महल में रहते गरीब देखें 


ईमान बिकता है बाजार में 

झूठ के भी है पुजारी देखें 


बहार से बतलाते जो प्यार

अंदर से नफ़रत के भंडार थे


अपना अपना कहने वाले भी

वक़्त आया तो पराए निकले


यहां सच कहो तो रुठते है लोग

झूठ कहो तो तालियां पीटते है


कौन है सच्चा जग में 'हर्ष'

दुःख के साथी हो वही बड़े है।


Rate this content
Log in