STORYMIRROR

मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

Others

3  

मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

Others

सपनों की पौध

सपनों की पौध

1 min
287

बचपन में अपने आँगन में

मैंने भी कुछ सपने बोये थे !

उम्मीदों से सींचा उन सबको,

अरमानों की थोड़ी खाद डाली

और आशा-रूपी धूप लगवाई !

   

कुछ पनप गए कुछ सूख गए,

खर-पतवार की संज्ञा दे कर

कुछ बड़े-बुज़ुर्गों ने तोड़ दिए !

और नये-नये सपनों के पीछे

कुछ को मैं ख़ुद भूल गया !

 

नादान था पर ना समझ सका

इंसानों और पौधों ही की तरह,

इन सपनों की भी अपनी एक

फ़ितरत ज़रूर हुआ करती है।


एक से पानी, खाद या धूप से

सब बीज पौधे नहीं बना करते !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन