STORYMIRROR

rit kulshrestha

Others

2  

rit kulshrestha

Others

सोंधी मिट्टी

सोंधी मिट्टी

1 min
182

उस गाँव की सोंधी मिट्टी में पलके

आज बड़े शहर में आ तो गए

कुछ परंपरा निभा तो रहे है

संस्कृति से परे रह तो रहे है

बस यूँ ही कुछ कह तो रहे है

पता नही क्यों जी नहीं रहे है

चाहा तो बहुत एक नई दुनिया बन जाये

कुछ गाँव कुछ शहर आ जाये

पर ऐसा कुछ हुआ नही

थोड़ी संस्कृति थोड़ी परंपरा बन जाये

सब कुछ अधूरा अधूरा बीच का रह गया

सही कहा है दो नाव में कौन सफर कर पाया

हम भी आज वही रह गए

उन पुराने दिनों की याद में

अपने आज को नापने में

फिर कुछ पूरा नही हुआ

आज भी एक हिस्सा

उस पुराने का मेरे अंदर ज़िंदा है

एक नया अपनी ही मटर भुनाने में लगा है

चलो कुछ तो होगा ही।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन