समर्पण की भावना जगाती दोस्ती
समर्पण की भावना जगाती दोस्ती
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रिश्तों में सबसे अच्छा रिश्ता है दोस्ती।
सुख दुख में सबसे पहले काम आती दोस्ती।।
कृष्ण सुदामा सी दोस्ती आज भी मिल जाएगी।
त्याग समर्पण की भावना जगाती है दोस्ती।।
कदम कदम से मिलाकर बचपन से चले साथ जो।
आजीवन वही साथ चल निभाते हैं दोस्ती।।
छल कपट धोखा भी होने लगे जमाने में।
धन के लालच में टूट जाती है अक्सर दोस्ती।।
खेल खेल में कई बार लड़ना झगड़ना होता।
अब बड़े होकर बड़ी जंग कराने लगी है दोस्ती।।
सच्चा दोस्त बन कर जो दिखाते हैं लोग यहाँ।
अमर उनकी ही होती है जमाने में राजेश दोस्ती।।
