स्कूल के दिन,यादें
स्कूल के दिन,यादें
भेल(बीएचईएल) परिसर की यादें
अपने गांव देहात से
भगवान के आशीष से
पिताजी की मेहनत से
जुड़े हम, भेल परिवार से।
निवासी पास गांव से
ठेठ गांव के परिवेश से
अपने खेत के चावल, उड़द
मोटे अनाज की रोटी, खास
मस्त स्वाद, हाथ से माँ के।
गाँव से स्कूल, फिर जवालापुर
माता के डेरे में 2 साल , पढ़ना
वहाँ से बाल भारती, पहुँचना
विद्या मंदिर सेक्टर 5, था खास।
नहीं रहा , मैं पढ़ाई में खास
सदव्यवहार में , कसर नहीं
अच्छे मित्र मिले , कुछ नहीं भी
कारवां बढ़ता रहा, कक्षाएं भी।
12वीं चिन्मय डिग्री कॉलेज
से किया पूरा।
मुझे मुश्किल से मिला, एडमिशन
विज्ञान स्ट्रीम में।
सामान्य अंक 12वीं में हुए थे
बमुश्किल पास।
अखबारों में अपने पास होने का
इंतज़ार था बहुत खास।
सरकारी आवास , दो कमरे में
समाया था संसार।
बालों को मिथुन, अमित जी
सा रखना, चौड़ी मोहरी की पैंट
लीडो क्लब में पिक्चर देखना
कभी कभी जमना पैलेस जाना
पिक्चर पर चर्चा करना, गंगा घाट
प्रेमनगर आश्रम में नहाना, वाह!
समय की खास बात, ये भी
खेलना , खूब खेलना
भरी दोपहरी , सर्दी, बरसात
ना टीचर का इतना प्रेशर
ना माता पिता का इतना
रोकना टोकना, वाह!
कब एडमिशन हुवा, पास हुवे
था एक सामान्य सी, बात!
क्रिकेट में निकला बहुत समय
बाल भारती , खूब चौके छक्के
धनीराम , ललित शर्मा, संजय,
ताराचंद, रुपेश , मनोज जैन, संदीप
अनिल, वीरेंद्र, अजित, राजेश वर्मा
उदयराज, शंकर, धर्मेश, अनिल सैनी
सुनील, भूपेन्द्र सिंह, राजीव शर्मा,
अजित, भूषण, विनोद,
बहुतों के मन में नहीं आ रहे, नाम
लेकिन समय वह खास था!
आपस के लड़ाई झगड़े
आपस में ही निपटना
यह भी बहुत खास था
टीचर पेरेंट्स को, दूर रखना
खुद ही सुलझना, निडरता से।
वीसीआर पर पिक्चर देखना
फिर दिन भर सोना, बस सोना
वह भी समय बहुत खास था
बातें ऐसे भी, लिखना ठीक नहीं
तनाव तो शब्द, था ही नहीं सुना।
किराए पर लेकर चंपक, फैंटम
किस्से कहानियों की किताबें
लेकर पढ़ना, वापस करना।
साइकिल पर स्कूल जाना
दोस्तों की साइकिल पर जाना
साईकल डंडे पर बैठना, बैठे-बैठे
दोनों का साइकिल चलाना
वाह क्या बात!
स्कूटर, विजयसुपर, चेतक
हर्ले डेवीसन , कहाँ कम थी।
समय बहुत याद आता है
टीचर की बातों को मानना
समझ में आए या ना आए
गर्दन हिलाना, व्यवस्थित रहना
दिल से उनकी इज्जत करना
बहुत याद आता है।
मेरा अपना गांव था , पास
साईकल, लम्ब्रेटा से वहां जाना
खेत खलिहान में मस्ती करना
फिर वापस भेल आवास परिसर
के वातावरण में ढलना!
इस पड़ाव पर , वक्त हालात में
तो लगता है , अपना वही समय
था बहुत खास , हाँ।
