'शरद का आगमन'
'शरद का आगमन'
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हो रई है वर्षा की विदाई,शरद ऋतु आई।
जीवन में मोद भरो रे।
रस-रस सूख सरित सर पानी।
ममता त्याग करहिं जिमि ज्ञानी।
फैली है सुंदर जुन्हाई,शरद ऋतु आई।
जीवन में मोद भरो रे।
उदित अगस्त पंथ जल सोषा।
जिमि लोभहि सोषहि संतोषा।
तनक-तनक ठंडी-सी आई,शरद ऋतु आई।
जीवन में मोद भरो रे।
जान शरद ऋतु खंजन आयें।
पाय समय जनु सुकृत सुहायें।
घट रह है,तला और तलाई शरद ऋतु आई।
जीवन में मोद भरो रे।
पंक ने रेनु सोह असि धरनी।
नीति निपुन नृप के जस करनी।
धरती सुहानी भई शरद ऋतु आई।
जीवन में मोद भरो रे।
