शहर
शहर
1 min
140
आज क्या हुआ इस शहर को
आज यहां पर सब बिखरे बिखरे से क्यूँ हैं
सब एक दूसरे के साथ हो कर भी
यूं दूर दूर से क्यूँ हैं
अब इस शहर में कोई चाहता नहीं है
एक दूसरे भलाई
यहां तो करते रहते है लोग
रोज एक दूसरे की बुराई
कहाँ गए वो दिन जब लोग इश्क के
नाम पर जान दे दिया करते थे...
आज कल तो लोग लव जिहाद के
नाम पर एक दूसरे की जान ले
लिया करते है।
कहां खो गए वो दिन जब घर में कोई
पूजा होती थी तो हम अपने दूर के
रिश्तेदार को भी बुलाया करते थे..
आज कल तो लोग सियासत के नाम पर
लोग अपने खून के रिश्ते को भी
पहचानने से इनकार करते हैं ...।
