Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Mayank Kumar 'Singh'

Others


5.0  

Mayank Kumar 'Singh'

Others


सावन

सावन

1 min 323 1 min 323

सावन तुझे कैसे लिखूं

तेरे भीतर मेरी

अनगिनत यादें हैं

कितनी पोटलियाँ खोलूं

कितनी यादों को समेटूं

सब जगह तुम्हारी छाया है !


प्रियसी से मिलना

फिर बिछड़ना

कुछ संवाद

कुछ एहसास

कुछ अलाप

कुछ विलाप

कुछ सफलता

कुछ विफलता

सब तुझ में ही समाए हैं !


तुम पूछोगे भला कैसे ?

उत्तर भी लेते जाओ -

तुझ में प्रचंड बिजली

की तपिश है

तुझ में करुणा भरी बारिश

तुझ में आक्रोशित पवन है

फिर,

तुझ में ही बारिश की

पहली सुगंध

तुझ में कोयल की पुकार

अरे भूल ही गया !


मेढक की टर -टर -आहट

तुम में ही तो है

और पंछियों को घोसले में

जाने की जल्दी

ग़रीब बच्चों का झरना

सावन तुम ही तो हो !!


इसलिए शायद शिव

की दुलारी ,

सबसे प्यारी

किसानों का उत्साह

और धरती का प्रेम प्रसंग

सब तुम में ही है सावन

भला तुम्हें कैसे लिखूं ,

लिख भी नहीं सकता !


पाताल से प्रलोक तक

सबका हर्ष और उल्लास

सब तुम ही हो सावन

सच में सावन

तुझे मैं लिख भी नहीं सकता !!



Rate this content
Log in