STORYMIRROR

Sanjay Jain

Others

3  

Sanjay Jain

Others

रात भर

रात भर

1 min
225

रखी थी खुली खिड़कियाँ रात भर

खनकती रही चूड़ियाँ रात भर


तुम्हारा तस्सवुर निगाहों में था

कड़कती रही बिजलियाँ रात भर


कहा था यही ख़्वाब में आऊँगी

जगाती रही हिचकियाँ रात भर


निगाहों निगाहों में क्या कह दिया

बहकती रही बालियाँ रात भर

                        

डूबा क्या दिए झील में पाँव बस

तड़पती रही मछलियाँ रात भर


हवाओं ने पैगाम तेरा दिया

मैं पढ़ता रहा चिट्ठियाँ रात भर


तुम्हें याद मैनें किया दो घड़ी

मचलती रही सिसकियाँ रात भर


तुम्हारा बदन बस छुआ था फकत

सुलगती रही उंगलियाँ रात भर



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन