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PIYUSH BABOSA BAID

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PIYUSH BABOSA BAID

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राह प्रवासी बच्चे

राह प्रवासी बच्चे

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नन्हा सा उनका पैर,

नन्हा सा उनके हाथ,

वो हंसता हुआ चेहरा,

जैसे खुशियों की सौगात।


वो उनका रास्तों पे घर,

हो जैसे खुशियों का महल,

वो गाड़ी के रुकते ही होहला कर उमड़ जाना,

ये मेरा और मुझे दो बोल कर झुमड़ जाना।


अपने पुराने कपड़े जो उनके लिए है नए जैसे,

खाना भी मिले उनको जैसे तैसे,

कभी भूखे पेट तो कभी फड़फड़ाती ठंड में बिना चादर की नींद,

फिर नई सुभा हो एक नई उम्मीदी किरण के जैसे।


आज फिर एक नए दिन के उगने के साथ,

चले तलाश में फिर वो ही गाड़ी का इंतजार,

एक नए काम के उम्मीद के लिए तैयार,

और कुछ ना मिले तो आसू से भरे रात ढलने को बेकरार।


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