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Sanjay Jain

Others


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Sanjay Jain

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राह दिखाता है

राह दिखाता है

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मुझे राह दिखा,

लाने वाले मेरे मन।

कभी राह खुद तुम,

यूँ ही न भटकना।

मुझे राह।

 

मोहब्बत में जीते,

मोहब्बत से रहते ।

मोहब्बत हम सब,

जन से है करते।

स्नेह प्यार की दुनिया,

हम है बसाते।

मुझे राह।।

 

न भेद हम करते,

जाती और धर्म में।

न भेद करते,

ऊंच और नीच में।

मैं रखता हूँ समान भाव,

अपने दिल में।

मुझे राह।।

 

हमे अपनी संस्कृति,

को है बचना ।

दिलो में लोगो के,

प्यार है जगाना।

अपनी एकता और

अखंडता बचाना।

मुझे राह ।।


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