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Manu Sweta

Others

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Manu Sweta

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प्रिय बसंत

प्रिय बसंत

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प्रिय बसंत जब भी

तुम आते हो

कितनी खुशियां

साथ मे लाते हो


सूखी डाली फिर से

हरिया जाती है

कोयल मतवाली होकर

गीत खुशी के गाती है

गौरी का मन भी इतराता है


जब कोई झोका हवा का

मन को छू जाता है।


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