परायापन
परायापन
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आ गयी तुम्हारे ज़िंदगी में
एक वक़्त की तरह
घुल गयी तुम्हारे ज़िंदगी में
घड़ी की तरह
रिश्ते भी तुम्हारे संभालती हूँ
हर घंटे की तरह
हर घंटा सिर्फ तुम्हारे लिए
तुम्हारे परिवार के लिए देती हूँ
अपने लिए कोई समय नहीं
निकाल पाती हूँ
फिर भी मेरा सुख ही तुम्हारे
सुख में है ये दिल कहता हैं
न जाने ऐसा तुम्हें भी लगता है
इतने करीब होकर भी तुम्हारे
नज़रों मैं मैं नहीं रहती हूँ
न जाने क्यों अनजान सी
महसूस करती हूँ
एक अटूट रिश्ता होने के बाद
फिर भी मैं तुम्हारे लिए पराई हूँ
