STORYMIRROR

आचार्य आशीष पाण्डेय

Others

4  

आचार्य आशीष पाण्डेय

Others

पीर दिल की

पीर दिल की

1 min
253

जीवन जिसके लिए जिया हूं

उसके लिए मरूंगा इक दिन

उसकी यादों को बिखेर कर

यादें उसकी बिनूगा इक दिन।।


कैसा भी वो किन्तु मेरे वो

दिल की धड़कन बना हुआ है

आज़ यहां मैं जो कुछ भी हूं

उसकी मांगी मिली दुआ है।।


गद्दार उसे कैसे कह दूं

जिसने वफ़ा किया है प्रतिपल

मैं ही सजा नहीं पाया

उसने प्यार दिया है प्रतिपल।।


पीर बहुत है दिल में मेरे

किन्तु रही है मीठी मीठी

रोती रहती हैं पल पल ये

राहों पर आंखें ये बैठी।।


Rate this content
Log in