STORYMIRROR

Dr.rajmati Surana

Others

2  

Dr.rajmati Surana

Others

फटी जेब

फटी जेब

1 min
387

जब जेब भरी थी, मेरी रिश्ते बंधे हुए थे,

फटने लगी जब जेब हमारी

तो रिश्ते एक एक कर टूटने लगे,

जो मेरे आसपास मंडराते थे कभी

वक्त के साथ सब बदल गए ।

पैसे थे तब रिश्तों की बाढ़ थी,

पैसों का अभाव रिश्ते अकाल हो गये।

हम जिन पर उम्र भर खुशियाँ लुटाते रहे, 

वे ही मुझे अकेला छोड़ गम दे गये।

बुरा वक्त क्या आया जीवन में मेरे, 

एक एक कर सब साथ छोड़ गये।

तन्हाई में अंदर ही अंदर घुटने लगा, 

जमाने के डर से गुमसुम रहने लगा।

रिश्तों की तुरपाई में खुद को भूल गया, 

राजा था मैं कभी आज रंक बन गया ।

भाग्यचक्र के भंवर में फंस गया मैं, 

अकेले आंसू बहाता रहा मैं

समझ नहीं आया ये क्या हो गया, 

फटी जेब तो सबसे पराया हो गया ।

हिम्मत के बल बूते आगे बढ़ता रहा ,

नयी राह मैं खोजता रहा ।


कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

इसे अपनाकर किस्मत को आजमाता रहा।

किस्मत फिर मुझ पर मेहरबान होने लगी,

धीरे-धीरे मेरी किस्मत बदलने लगी,

फटी जेब से कभी सिक्के गिरते थे,

आज वो जेब नोटों से सिल गई ।

तजुर्बा जिंदगी का मुझे मिला, 

रिश्तों की तुरपाई, सिलाई में, 

धन रूपी धागा का हो अभाव,

तो रिश्ते फटे फटे से ही रहते हैं ।।



Rate this content
Log in