STORYMIRROR

GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Children Stories

3  

GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Children Stories

फटी जेब

फटी जेब

1 min
207


क्या बताऊ जेब का 

फटी जेब मे कुछ नही 


चंद रुपयो का महीना मेरा

बढ़ती महंगाई काबू मे नही 

दोबच्चों का परिवार मेरा 

दो रोटी मिल जाए तो गम नही


फटी जेब की हालत मेरी

यही मजबूरी शान मेरी 


ऐसी हालत कभी ना थी 

अपना था रोजगार 

अपनी थी कमाई , 

अपना खर्च अपना दर्द 


कम कमाई को छुपाता हूँ 

फटी जेब से उधार खाता हू 


कम्पनियो की होड़ में

पिस गए रोजगार झोल में

फटी जेब सा हाल मेरा 

ना खुशियाँ है ना माल मेरा


बिक गया है ज़मीर

बिक गए है अमीर

खून चूसने जैसी नौकरी 

मालामाल होते वजीर 


समाज का कोई दोष नही है 

जैसा पानी दिखता है 

वैसा लोग भरते है 

फटी जेब पर मायुस नही 

उल्टा हम ही पर हँसते है 


एक आस होती है बच्चो की 

एक बात होती है खर्चो की 

फटी जेब से क्या निकलेगा 

एक बात होती सपनो की 


या बताऊ जेब का 

फटी जेब मे कुछ नही....



-



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन