STORYMIRROR

Manish kumar Gautam

Others

4  

Manish kumar Gautam

Others

फिर खड़ा हो जाऊंगा

फिर खड़ा हो जाऊंगा

1 min
265

कहीं गिरे औंधे मुंह

तो, मैं फिर खड़ा हो जाऊंगा।

बिना किसी के आस लिए

मंजिल के होकर रह जाऊंगा।।


पग कि बेड़ियां तोड़कर

पंख से हम आसमां नापूंगा।

बिना समुद्र में उतरे हुए

उसकी गहराई कैसे जानूंगा।।


अंधियारे ने रोक लिया

तो खुद का एक दीप जलाऊंगा।

जहां तक चलेगी आखरी

सांसें वहां सें जाकर आऊंगा।।


स्वयं पे विश्वास होगा तो,

तब जाकर मनीष बन पाऊंगा।

जो कही गिरे औंधे मुंह

तो, मैं फिर खड़ा हो जाएंगे।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन