STORYMIRROR

Dr Jogender Singh(jogi)

Others

3  

Dr Jogender Singh(jogi)

Others

पाठ प्रकृति का

पाठ प्रकृति का

1 min
53

यादों के झोले में पड़ी कुछ,

धुँधली सी तस्वीरें,

अनायास आँखो के सामने आ गई।


रोते हँसते, शरारत करते 

खुद को देख।

यूं ही, मुस्कुराता हूं।


अंधी इस दौड़ में,

न जाने क्या पाने की होड़ में?

सांस लेने का वक़्त कैसे निकाला था,

एक दौर ऐसा भी जी डाला था।


करना मर्यादाओं को तार तार,

आदत, जो लत बन गई थी।

अब तू लक्ष्मण रेखा का,

सम्मान करना, बता रहा।

वाह रे covid ,तू जीना सीखा रहा।


Rate this content
Log in