पालतू कुत्ता
पालतू कुत्ता
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उसकी सारी शख्सियत नखों और दाँतों की वसीयत है
दूसरों के लिए वह एक शानदार छलांग है
अँधेरी रातों का जागरण है
नींद के खिलाफ़ नीली गुर्राहट है
अपनी आसानी के लिए तुम उसे कुत्ता कह सकते हो
उस लपलपाती हुई जीभ और हिलती हुई दुम के बीच
भूख का पालतूपन हरकत कर रहा है
उसे तुम्हारी शराफ़त से कोई वास्ता नहीं है
उसकी नज़र न कल पर थी न आज पर है
सारी बहसों से अलग वह हड्डी के एक टुकड़े और
कौर-भर (सीझे हुए) अनाज पर है।
