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ZEBA PARVEEN

Others

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ZEBA PARVEEN

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नज़र

नज़र

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बदलती हुई, नज़रों को देखा मैंने कई बार

नासमझ थी, नहीं समझ पायी इसका राज़

नज़रें भी कितनी बेईमान होती

ये जान लिया, मैंने भी पहली बार

जो हर पल देखा करती,

आज देखकर, हो जाती अनजान

जैसे देख रहीं हो पहली बार

नज़रों का था, धोखा मेरा

नज़रों ने ही बता दिया

बदलती हुई, देखकर नज़र

जब नज़र को मैं ने हटा लिया

नज़र न लगे, इस नज़रिये को मेरे

जिस नज़रिये को मैंने जान लिया


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