नटखट कान्हा
नटखट कान्हा
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नटखट कान्हा आए हैं
मोर मुकुट माथे पर सजे
हाथ में बांसुरी
चंचल नैन
आंखों में काजल
कान्हा मंद मुस्काए है
मैया यशोदा के दुलारे
नन्हे नन्हे पांव से कर रहे अठखेलियां
लीला से सबका मन लुभाए है
कृष्ण कन्हैया रास रचैया
गोपियों के मन भाए हैं
बाजे ढोल मृदंग है
कान्हा देखी इतराए है
सारे जग के रचयिता
देखो कान्हा आए हैं।
